राम मंदिर के बाद MP के सिद्धपीठ बगलामुखी में भी चढ़ावा चोरी, जांच के लिए कमेटी गठित

राम मंदिर चंदा चोरी के बाद अब मध्य प्रदेश के आगर मालवा में स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा में फर्जी दान वसूली का बड़ा मामला सामने आया है।

Updated: Jul 08, 2026, 10:43 AM IST

आगर मालवा। अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ की मध्य प्रदेश के नलखेड़ा में स्थित विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां भी चढ़ावा चोरी के आरोप लगे हैं। दावा है कि यहां गैर सरकारी समिति गठित कर चांदी, आभूषण और नगदी की चोरी की गई। मामला सामने आने के बाद जिला कलेक्टर ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित शक्तिपीठ में एक गैर-सरकारी संस्था द्वारा साल 2024 से लगातार मंदिर के गर्भगृह और परिसर के भीतर समानांतर व्यवस्था चलाई जा रही थी। संस्था द्वारा भक्तों से अवैध रूप से लाखों रुपये का कैश और कीमती सोने-चांदी के आभूषण वसूला जा रहा था।

मामला तूल पकड़ने के बाद आगर मालवा की कलेक्टर प्रीति यादव ने मंगलवार को तत्काल प्रभाव से एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया। कलेक्टर प्रीति यादव ने बताया कि एक गैर-सरकारी संगठन के खिलाफ फर्जी रसीद कट्टा छपवाकर अवैध उगाही करने की गंभीर शिकायतें मिली थीं। इस पर एक्शन लेते हुए कमेटी को मामले की तह तक जाने और आगामी 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

इस जांच कमेटी के अध्यक्ष मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बी.एस.सोलंकी होंगे। उनके साथ जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नगर परिषद नलखेड़ा की मुख्य नगर पालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल को सदस्य बनाया गया है। यह समिति सात दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेगी। कलेक्टर ने अपने आदेश में जांच समिति को निर्देश दिए हैं कि वह यह जांच करे कि क्या मंदिर परिसर में अधिकृत प्रबंधन व्यवस्था से अलग समानांतर दान संग्रह की व्यवस्था संचालित की गई है या चल रही है।

साथ ही समिति यह भी जांच करे कि श्रद्धालुओं से मिले नगद, सोना और चांदी का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है, उसका लेखा-जोखा किस प्रकार रखा गया है, संबंधित बैंक खातों और अभिलेखों की स्थिति क्या है और इस पूरे मामले में किसी अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन या अन्य संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही बनती है या नहीं। कलेक्टर के आदेश में यह भी कहा गया है कि जांच दल तत्काल मंदिर परिसर का निरीक्षण करे। आवश्यक दस्तावेज, साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करे और अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट और अनुशंसाएं सात दिनों में पेश करे।