ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज स्ट्रेट, लेबनान में इस्राइली हमले से बढ़ा तनाव

ईरान ने होर्मुज का जलमार्ग फिर से बंद करने का एलान किया है। ईरानी सेना के इस कदम से पश्चिम एशिया में तनाव फिर से भड़कने की आशंका है।

Updated: Jun 21, 2026, 02:41 PM IST

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य फिर बंद करने का एलान किया है। लेबनान में इस्राइली सेना की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताते हुए ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने होर्मुज बंद करने का एलान किया। लेबनान में इस्राइली हमलों का हवाला देते हुए सरकारी टीवी पर बयान जारी किया गया। माना जा रहा है कि ईरान की तरफ से इस कदम के बाद इलाके में तनाव बढ़ सकता है। 

दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच 111 दिनों की जंग के बाद युद्ध समाप्त करने को लेकर 14 बिंदुओं का समझौता हुआ है। इसे इस्लामाबाद समझौते का नाम दिया गया है। इस समझौते में इस्राइल शामिल नहीं है। और इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ किया है कि ईरान की सेना लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। ऐसे में ईरान की तरफ से होर्मुज को एक बार फिर बंद किए जाने का फैसला क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकता है।

ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान का कहना है कि उसने दक्षिणी लेबनान पर इस्राइल के हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। ईरान ने इन हमलों को अमेरिका के साथ हुए समझौते का उल्लंघन बताया है। सरकारी टीवी पर जारी एक बयान में 'खतम-अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' ने कहा, 'इसके जरिए घोषणा की जाती है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया जाएगा। यह ध्यान दिया जाए कि यह पहला कदम दुश्मन द्वारा किए गए वादे के उल्लंघन का जवाब है, और अगर आक्रामकता जारी रहती है, तो दुश्मन को अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए मजबूर करने के लिए आगे के कदम उठाए जाएंगे'।

ईरान के होर्मुज बंद करने की प्रक्रिया अमेरिका पर दबाव है कि वह इस्राइल को समझौता की पहली धारा को लागू करने के लिए मजबूर करे। ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ बातचीत करने वाला प्रतिनिधिमंडल जल्द ही स्विट्जरलैंड जाएगा। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट है कि एक प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड जाएगा ताकि आगे की कार्रवाई हो सके और अमेरिका से अंतरिम समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा करने की मांग की जा सके।

फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'स्विट्जरलैंड में, हमारा इरादा दूसरी पार्टी (अमेरिका) पर अपने वादों को पूरा करने के लिए दबाव डालना और यह स्पष्ट करना है कि वे अपनी जिम्मेदारियों पर कैसे अमल करने की योजना बना रहे हैं'। वहीं मेहर न्यूज एजेंसी ने एक रिपोर्ट में कहा है कि प्रतिनिधिमंडल कुछ ही मिनटों में स्विट्जरलैंड के लिए रवाना होगा। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका अपने वादों को पूरा करने से इनकार करता है, तो ईरान जरूरी कदम उठाकर जवाब देगा।