गरीबी में बीता था पद्मश्री सम्मान पाने वाली भूरी बाई का बचपन, कभी भोपाल के भारत भवन में की थी मजदूरी

चित्रकार भूरी बाई के अलावा भोपाल के ही लोक कला विशेषज्ञ कमलेश तिवारी को किया जाएगा सम्मानित

Updated: Jan 26, 2021, 11:06 AM IST

गरीबी में बीता था पद्मश्री सम्मान पाने वाली भूरी बाई का बचपन, कभी भोपाल के भारत भवन में की थी मजदूरी
Photo Courtesy: Patrika

भोपाल। भोपाल की दो हस्तियों को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का ऐलान हुआ है। चित्रकार भूरी बाई और लोक कला विशेषज्ञ कमलेश तिवारी को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का ऐलान हुआ है। चित्रकार भुरी बाई जनजातीय परंपराओं के ऊपर चित्रकारी करती हैं। भूरी बाई की पिथोरा पेंटिंग्स की पहुंच अमेरिका तक है। 

गरीबी में बीता था बचपन, करनी पड़ी थी मजदूरी 

पद्मश्री से सम्मानित भूरी बाई का जीवन काफी अभाव में बीता था। भूरी बाई भील जनजाति से आती हैं और मध्यप्रदेश के झाबुआ ज़िले के पिटोल गांव की रहने वाली हैं। भूरी बाई बताती हैं कि उनका जीवन काफी गरीबी में बीता था। हालात ऐसे थे कि भोपाल स्थित भारत भवन में भूरी बाई को मजदूरी तक करनी पड़ी थी। मौजूदा समय में भूरी बाई जनजातीय संग्रहालय में कलाकार के पद पर कार्यरत हैं। 

भूरी बाई मध्यप्रदेश के सम्मानों को भी जीत चुकी हैं। भूरी बाई को 1986-87 सर्वोच्च पुरस्कार शिखर से सम्मानित किया जा चुका है। 1998 में मध्यप्रदेश सरकार ने उन्हें अहिल्या सम्मान से वशीभूत किया था। पद्म श्री से सम्मानित होने की घोषणा के बाद जब मीडिया से भूरी बाई से बात की तो भूरी बाई काफी खुश नज़र आ रही थीं। अति पिछड़े इलाके से आने के कारण भूरी बाई ठीक से हिंदी नहीं बोल पाती हैं लेकिन उन्होंने सम्मान मिलने की बात पर कहा कि वे काफी खुश हैं।