राजगढ़ ज़िला अस्पताल में सोनोलाजिस्ट की नियुक्ति की मांग, जल्द सोनोग्राफी सुविधा नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी

राजगढ़ जिला चिकित्सालय में कई साल से सोनोग्राफी मशीन बंद है, यहां सोनालाजिस्ट नहीं है, परेशान लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य विभाग को 15 दिन का दिया अल्टीमेटम

Updated: Mar 30, 2021, 12:52 PM IST

राजगढ़ ज़िला अस्पताल में सोनोलाजिस्ट की नियुक्ति की मांग, जल्द सोनोग्राफी सुविधा नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी
Photo courtesy: bhaskar

भोपाल। राजगढ़ ज़िला चिकित्सालय में सालों से सोनोग्राफी मशीन बंद पड़ी है। जिसकी वजह से ग्रामीण इलाकों की गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की तकलीफ को देखते हुए राजगढ़ निवासी मेहरबान सिंह वर्मा ने सोनोलॉजिस्ट की स्थापना के लिए आंदोलन करने की बात कही है। मेहरवान सिंह वर्मा ने ट्विटर पर एक अखबार में छपी रिपोर्ट को ट्वीट किया है।

उन्होंने कहा है कि वे जिला चिकित्सालय राजगढ़ में सोनोग्राफी करने के लिए सोनोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए आंदोलन करना चाहते हैं। वे लिखते हैं कि यहां कई साल से करोड़ों रुपए की सोनोग्राफी मशीन धूल खा रही हैं। गरीब मरीज परेशान हो रहे हैं। उन्होंने लोगों से समर्थन मांगते हुए माननीयों से भी आंदोलन में साथ आने की अपेक्षा की है। उहोंने पूछा है कि कितने लोग उनका साथ देंगे। 

जिसके बाद इस मामले में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का एक ट्वीट सामने आया है। उन्होंने मेहरबान सिंह के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा है कि वे उनके साथ हैं, पहले 15 दिन में सोनोग्राफी मशीन लगाने का आवेदन किया जाए, अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर उसके बाद आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाए। उन्होंने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग को तत्काल संज्ञान में लेने को कहा है।  

 


दरअसल राजगढ़ जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से सोनोग्राफी मशीन लगाई गई थी। जिसका संचालन आउटसोर्सिंग के माध्यम से बुलाए गए सोनोलॉजिस्ट करते थे। कुछ समय बाद उस सोनोलॉजिस्ट ने काम छोड़ दिया। तब से कई वर्ष गुजर जाने के बाद भी किसी नए सोनोलॉजिस्ट की नई नियुक्ति नहीं की गई है। जिसकी वजह से राजगढ़ और उसके आसपास के ग्रामीण इलाको की गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी कराने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। गरीबों को निजी अस्पतालों के चक्कर लगाना पड़ता है। जिसके लिए निजी अस्पताल मोटी रकम वसूलते हैं।

निजी अस्पतालों में एक-एक सोनोग्राफी के लिए 1000 से 1200 रुपए तक वसूले जाते हैं। ज्यादा पैसे लगने की वजह से गरीब महिलाएं जरूरत होने पर भी सोनोग्राफी करवाने से कतराती हैं।ऐसे में जिले के सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी व्यवस्था संचालन की मांग की जा रही है। जल्द से जल्द सोनोलॉजिस्ट की नियुक्ति की मांग की जा रही है, अगर ऐसा नहीं होता तो यहां के लोग आंदोलन की तैयारी में हैं। इस की मांग कई सामाजिक संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण ज़िला प्रशासन से लगातार कर रहे हैं, अब उन्हें कांग्रेस का समर्थन भी मिल गया है।