Guna Dalit Atrocity : CM शिवराज सिंह 15 साल गब्बू पारदी पर क्यों रहे मेहरबान

Congress on Guna case : आपराधिक रिकार्ड वाले गब्बू पारदी के किस BJP मंत्री से सम्बंध, जब अतिक्रमण हटा दिया था तब फिर किसकी शह पर हुआ कब्जा

Publish: Jul 18, 2020 04:11 PM IST

Guna Dalit Atrocity : CM शिवराज सिंह 15 साल गब्बू पारदी पर क्यों रहे मेहरबान

भोपाल।  बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा द्वारा अतिक्रमणकारी गब्बू पारदी के साथ रिश्तों को लेकर लगाए गये आरोप में कांग्रेस ने आक्रामक रुख़ अख़्तियार किया है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पूछा है कि गब्बू पारदी का आपराधिक रिकॉर्ड होने के बावजूद 15 साल से शिवराज सरकार उसे क्यों बचा रही थी। किस बीजेपी नेता की शह पर गब्बू पारदी ने शासकीय जमीन कब्जा कर रखी थी। गब्बू  पारदी पर 16 से ज्यादा जघन्य अपराध के मामले दर्ज हैं तो बीजेपी सरकार ने गब्बू पारदी पर क्यों कोई कार्रवाई नहीं की। गब्बू पारदी के आपराधिक रिकार्ड का एक दस्तावेज इन दिनों मीडिया में चर्चा में है। निम्नलिखित फोटो में उसे देखा जा सकता है-  

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूछा है कि गब्बू पारदी पर अनेकों हत्या, लूट जैसे प्रकरण दर्ज हैं तथा इसी गब्बू ने शिवराज सरकार के 15 वर्षो के शासनकाल में सरकारी जमीनों पर कब्जा किया। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह गब्बू पारदी पर क्यों मेहरबान रहे? ऐसे शातिर अपराधी पर जिलाबदर व रासुका की कार्यवाही क्यों नहीं की गई ?

क्या है पारदी का बीजेपी कनेक्शन 

दिग्विजय सिंह ने कहा है कि राजनीतिक फायदा उठाने के लिये प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने जब जांच की बात की है तो इस मामले की हर तरह से जांच की जानी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने पूछा है कि इन पारदियों के पांच गांव किसकी विधानसभा एवं किसकी लोकसभा के अंतर्गत आते है? गब्बू के भाई की पत्नी सुलोचना बमोरी जनपद अध्यक्ष रही है और वीडियो पर आई बातचीत में वे साफतौर पर स्वीकार कर रही है कि भाजपा विधायक रही ममता मीना और उनके आईपीएस पति से उसके प्रगाढ़ संबंध रहे। इसका मोस्टवांटेड भाई फरारी के दौरान भी इन लोगों से बातचीत करता रहा है।

दोबारा पारदी कैसे काबिज हो गए

पूर्व मुख्यमंत्री ने गुना कांड में प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि इस घटना में प्रशासन की ओर से भी लापरवाही बरती गई है। पूर्व में जब अतिक्रमण हटाया गया था तब एस.डी.एम. शिवानी गर्ग का गुना के कब्जाधारी पारदियों से सीधा टकराव हुआ था और  अतिक्रमण हटा दिया गया था। उसके बाद  प्रशासन ने क्यों रूपरेखा तैयार नही की? आखिर खाली करवाई गई जमीन पर सरकार ने अपने आधिपत्य का बोर्ड क्यों नहीं लगाया? फिर दोबारा पारदी कैसे काबिज हो गए। उन्होंने कहा कि जब एस.डी.एम. को पता था कि वहां विवाद की स्थिति बनती है तो वे किस बात के डर से वहाॅ नही पहुँची? साथ ही पारदियों के निवास और जमीन की भी जांच होनी चाहिए। 

आरोप है कि पारदियों ने कई दलित गरीबों के मकान छीन कर अंगूठा लगवाकर उसपर मालिकाना हक प्राप्त किया है। जगनपुरा रोड के दोनों ओर दर्जनों पारदी सरकारी और भू-दान की जमीन को हथियाकर बैंठे है। इन्हें गुना में किसने बसाया इसकी भी जांच होनी चाहिए।

सिंधिया समर्थक मंत्री से भी सम्बंध 

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि कब्जाधारी गब्बू पारदी के भाई मन्ना का साला मोहर पारदी 25 हजार का ईनामी बदमाश है। जो हड्डीमील गुना का निवासी है। उसके संबंध कांग्रेस के बागी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक एक मंत्री से हैं। पारदी का परिवार मंत्री की कोठी पर लगातार आता जाता है। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि इस खुलासे से समझा जा सकता है कि पारदियों की पहुँच कहां-कहां तक है।

विवाद क्या है

असल में गब्बू पारदी का नाम तब सामने आया, जब गुना में अवैध जमीन पर खेत जोत रहे दलित किसान दंपति को पुलिस ने कैमरे के सामने पीट दिया। दुखी दंपत्ति ने परेशान होकर ज़हर खा लिया और पुलिस ने उल्टा पीड़ित पर ही एफआईआर दर्ज करा दिया। पड़ताल हुई तो पता चला कि जिस अवैध जमीन पर दलित दंपति राजकुमार अहिरवार खेत जोत रहा था, वो गब्बू पारदी के कब्जे की थी। जिसे उसने दलित किसान राजकुमार अहिरवार को बंटाई पर दी थी।

मीडिया में मामला उछलने से परेशान सरकार ने आनन फानन में कलेक्टर और एसपी का ट्रांसफर कर दिया। कुछ पुलिसवालों पर कार्रवाई भी हुई। लेकिन राजनीतिक रूप से मामला काफी चर्चित हो गया था। इस बीच बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने गब्बू पारदी के दिग्विजय सिंह से संबंधों की जांच कराने की मांग कर दी। दिग्विजय सिंह ने इसी मांग का जवाब देते हुए गब्बू पारदी का कच्चा चिट्ठा सामने ला दिया ।

अब मामला बीजेपी सरकार के पाले में है। गब्बू पारदी पर रासुका लगाने और आपराधिक रिकार्ड के मुताबिक कार्रवाई की मांग की जा रही है।