ग्वालियर में फर्जी सिम नेटवर्क का पर्दाफाश, एक फोटो पर जारी किए सैकड़ों कनेक्शन, साइबर ठगी की भी आशंका

ग्वालियर में फर्जी सिम कार्ड के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। ऑपरेशन फेस के तहत खुलासा हुआ कि एक ही चेहरे का इस्तेमाल कर अलग-अलग नामों पर सैकड़ों सिम बेचे गए थे।

Updated: Mar 30, 2026, 03:23 PM IST

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में फर्जी सिम कार्ड के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। यहां एक पीओएस संचालक ने नियमों को दरकिनार करते हुए एक ही व्यक्ति की फोटो और आधार का इस्तेमाल कर अलग-अलग नामों पर सैकड़ों सिम कार्ड जारी कर दिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब जिस व्यक्ति की फोटो सिम फॉर्म में लगाई जा रही थी वही खुद पुलिस के पास पहुंच गया। पुलिस को आशंका है कि इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल साइबर ठगी जैसे अपराधों में किया गया होगा।

पूरे मामले में जांच के दौरान सामने आया है कि गिरवाई क्षेत्र निवासी उमेश कुशवाह ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए अपने साथी आशीष नागर को लालच देकर शामिल किया था। आशीष का काम ग्राहकों की जगह खुद की फोटो लगाकर सिम एक्टिवेट करना था। इसके बदले उसे हर सिम पर करीब 500 रुपये मिलते थे। जबकि, मुख्य आरोपी एक सिम के लिए एक से डेढ़ हजार रुपये तक वसूलता था। 

यह भी पढ़ें:बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव, CM नीतीश कुमार ने छोड़ा MLC पद, नितिन नबीन ने भी विधायकी से दिया इस्तीफा

पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि जैसे ही आरोपियों को कार्रवाई की भनक लगी वैसे ही उन्होंने बचने की कोशिश शुरू कर दी थी। मुख्य आरोपी ने इंस्टाग्राम मैसेंजर के जरिए अपने साथी को अंडरग्राउंड होने का संदेश भेजा था। जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे पहले से ही सतर्क थे और सबूत मिटाने की कोशिश कर रहे थे।

यह कार्रवाई ऑपरेशन फेस के तहत की गई है। यह सिम कार्ड जारी करने में फेशियल ऑथेंटिकेशन नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा अभियान है। इस ऑपरेशन के तहत ग्वालियर में यह पहली एफआईआर दर्ज की गई है। झांसी रोड थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह भी पढ़ें:कुवैत के पावर प्लांट पर ईरान का हमला, एक भारतीय नागरिक की हुई मौत

अब तक पुलिस ने सात फर्जी सिम कार्ड बरामद किए हैं जो गुढ़ा गुढ़ी का नाका क्षेत्र की प्रीतमपुर कॉलोनी और कुम्हारों के मोहल्ले के निवासियों के नाम पर जारी किए गए थे। जबकि, सभी में एक ही व्यक्ति की फोटो का इस्तेमाल किया गया था। इससे साफ है कि दस्तावेजों के साथ बड़े स्तर पर छेड़छाड़ कर नेटवर्क तैयार किया गया था।

एएसपी विदिता डागर के मुताबिक, यह सिर्फ शुरुआती कार्रवाई है और जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह के तार कई साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ सकते हैं जिससे आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

यह भी पढ़ें:फ्यूल सप्लाई बनाए रखने के लिए केंद्र का बड़ा फैसला, अब पेट्रोल पंपों पर भी मिलेगा केरोसिन