वीडी सतीशन होंगे केरलम के नए मुख्यमंत्री, आज शाम राज्यपाल से मिलकर पेश करेंगे सरकार बनाने का दावा
दिल्ली में बैठक के बाद गुरुवार को केरल में विधायक दलों की बैठक हुई। बैठक में वीडी सतीशन के नाम पर अंतिम मोहर लगाई गई। अब वीडी सतीशन केरल के मुख्यमंत्री बनेंगे।
त्रिवेंद्रम। कांग्रेस पार्टी ने 10 दिन मंथन के बाद आखिरकार केरल के मुख्यमंत्री का नाम फाइनल कर लिया है। वीडी सतीशन केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में वीडी सतीशन के नाम पर फैसला किया गया। अब कांग्रेस केरल समिति राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिलकर राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है।
कांग्रेस नेता दीपा दासमुंशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस ने तिरुवनंतपुरम में 7 मई को मीटिंग की थी। पार्टी अध्यक्ष खड़गे, राहुल गांधी से चर्चा के बाद तय किया गया कि केरलम CM वीडी सतीशन होंगे। वहीं, नाम के ऐलान होने का बाद सतीशन ने कहा कि मैं इस पद को निजी उपलब्धि नहीं बल्कि दैवीय कृपा मानता हूं। मैं केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला समेत सभी नेताओं को अपने विश्वास में लूंगा।
दरअसल, केरलम के मुख्यमंत्री पद के लिए तीन नेताओं केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्नीथला और वी डी सतीशन के नाम चर्चा में थे। आखिर में सतीशन के नाम पर मुहर लगी। इससे पहले दावा किया जा रहा था कि ज्यादातर विधायक वेणुगोपाल के समर्थन में थे। वेणुगोपाल को केंद्रीय नेतृत्व के करीबी नेता माना जाता है, जबकि सतीशन का मजबूत जनाधार था। वेणुगोपाल को सीएम न बनाने के लिए पोस्टर भी लगाए गए थे।
कांग्रेस समर्थकों ने सतीशन के सीएम बनाने के समर्थन में वायनाड में भी पोस्टर लगाए गए थे। इनमें लिखा था, 'राहुल और प्रियंका वायनाड को भूल जाओ, यहां फिर नहीं जीतोगे। वायनाड अगला अमेठी होगा। समर्थकों हाईकमान को चेताया है कि केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया, तो ठीक नहीं होगा।'
केरलम में UDF ने 140 में से 102 सीटें जीती हैं। इनमें कांग्रेस की 63 सीटें हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस विधायकों की बैठक में 75-80 फीसदी विधायकों ने केसी वेणुगोपाल को समर्थन दिया था। वीडी सतीशन को महज 6 विधायकों का समर्थन मिला था। हालांकि, बैठक के बाद तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्षों ने सतीशन के नाम का समर्थन किया था। इसके अलावा UDF के सहयोगी दल IUML और केरलम कांग्रेस (जोसेफ) ने खुले तौर पर सतीशन को समर्थन किया।
वीडी सतीशन का जन्म 31 मई 1964 को केरल के एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर में हुआ। उन्होंने अपनी पढ़ाई केरल में ही पूरी की और आगे चलकर कानून (LLB, LLM) की पढ़ाई की। छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा और KSU (केरल स्टूडेंट्स यूनियन) से जुड़े। महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई. इसके अलावा राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) में जिम्मेदारी भी निभाई। यहीं से उनकी राजनीतिक नींव तैयार हुई। वे साल 2001 में पहली बार परूर विधानसभा सीट से विधायक बने। इसके बाद लगातार 6 बार जीत दर्ज की। परूर को कांग्रेस का मजबूत गढ़ बनाने का श्रेय इन्हीं को जाता है। उनका यह रिकॉर्ड उन्हें राज्य के सबसे भरोसेमंद और मजबूत जनाधार वाले नेताओं में शामिल करता है।




