मध्य प्रदेश में दिखा चक्का जाम का व्यापक असर, किसानों के साथ सड़कों पर उतरी कांग्रेस

कृषि आंदोलन के खिलाफ देशव्यापी चक्का-जाम, ग्वालियर में किसानों ने रोका ट्रैफिक, उज्जैन में सड़क पर बनाई गईं रोटियां, प्रदेश के सभी जिलों में एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन

Updated: Feb 06, 2021, 06:30 PM IST

मध्य प्रदेश में दिखा चक्का जाम का व्यापक असर, किसानों के साथ सड़कों पर उतरी कांग्रेस

भोपाल। कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के आह्वान पर आज देशव्यापी चक्का जाम का मध्यप्रदेश में भी व्यापक असर देखने को मिला। शनिवार दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक घोषित चक्का जाम के दौरान पूरे प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसानों का साथ दिया और सड़कों पर उतरकर चक्का जाम के कॉल को लागू करवाया। इस दौरान सुरक्षा को देखते हुए राज्य सरकार ने पुलिस को अलर्ट कर रखा था।

कृषि मंत्री के क्षेत्र में चक्का जाम सबसे ज्यादा असर

चक्काजाम का असर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के इलाके में सबसे ज्यादा देखने को मिला। मुरैना में किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरियर चौराहे पर NH-3 को जाम किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। किसानों में चक्काजाम के दौरान सड़कों पर बैठकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और तीन नए कानूनों को वापस लेने की मांग की। 

 

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के श्योपुर में किसानों के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी श्योपुर-कोटा राजस्थान हाइवे और श्योपुर-पाली सवाई माधोपुर हाइवे को जाम कर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। ग्वालियर के बड़ागांव हाइवे पर भी किसानों ने रोड ब्लॉक किया। 

राजगढ़ में कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया गया। जानकारी के मुताबिक धरना प्रदर्शन के दौरान सुठालिया में कुछ कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद इन्हें थाने से जमानत पर रिहा कर दिया गया। जिला मुख्यालय पर कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना जारी रहा, इसके अलावा जीरापुर में धरना प्रदर्शन हुआ। 

भोपाल में पीसी शर्मा के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन

प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस कमेटी ने मध्य क्षेत्र विधायक पीसी शर्मा के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। इस दौरान भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन को देखते हुए पहले से ही प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात कर दिया था। इस दौरान पुलिस के द्वारा पूर्व मंत्री शर्मा को जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

उज्जैन में सड़क पर बनाईं रोटियां

उज्जैन में प्रदर्शन के दौरान दिलचस्प नजारा देखने को मिला। यहां कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान महंगाई का भी मुद्दा उठाया गया। चक्का जाम कर रहे किसानों का साथ देने आई महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर रोटियां बनाईं। महिला कार्यकर्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ा रही है और इसके कारण गरीबों के घर में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। इसीलिए सड़क पर चूल्हा जलाकर हम सरकार को जगाने का प्रयास कर रहे हैं। 

वहीं इंदौर में महाराणा प्रताप चौराहा, राऊ पिगडंबर एबी रोड पर किसानों ने सांकेतिक रूप से चक्का जाम किया। इस दौरान वे सड़कों पर बैठ गए हालांकि उन्होंने यातायात को बाधित नहीं किया और गाड़ियों की आवाजाही के लिए रास्ते छोड़ दिए। इस दौरान जिला प्रशासन ने किसानों से ज्यादा संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात कर रखा था। प्रदर्शन के बाद एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की गई। 

मंदसौर में हिरासत में लिए गए किसान 

शिवराज सरकार के दौरान किसानों पर हुए फायरिंग के बाद चर्चा में आए मंदसौर जिले के किसानों ने भी कृषि कानूनों का विरोध किया। मंदसौर में सैंकड़ों की संख्या में किसानों ने सड़क पर बैठकर हाइवे जाम किया। इस दौरान पुलिस ने बलप्रयोग करते हुए किसानों को हिरासत में ले लिया। 

छिंदवाड़ा में भी चक्काजाम का काफी असर देखने को मिला। छिंदवाड़ा कांग्रेस द्वारा किसानों के समर्थन में चक्काजाम करके मोदी सरकार के तीनों काले कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग की गई। 

भिंड में प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। जिला प्रशासन द्वारा किसानों को प्रदर्शन करने से रोकने के प्रयासों के बावजूद किसानों ने अपना प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान सैकड़ों किसान व कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसके बाद पुलिस ने यहां भी काफी लोगों को गिरफ्तार कर लिया। 

किसानों के समर्थन में अंतिम क्षण तक खड़ी रहेगी कांग्रेस

किसानों के आह्वान पर देशव्यापी चक्काजाम का कांग्रेस द्वारा समर्थन किए जाने को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि कांग्रेस अंतिम क्षण तक किसानों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा, 'आज पूरे देश में चक्का जाम है। मोदी सरकार ने किसान विरोधी काले कानून लाए हैं। हम मोदी के कानों तक यह बात पहुंचाना चाहते हैं कि किसानों का परिवार तबाह हो रहा है। 

देश भर के किसान पिछले ढाई महीनों से दिल्ली बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने किसानों के साथ 11 राउंड की बातचीत के बाद भी उनके मांगों को मानने से इनकार कर दिया है। वहीं किसान संगठनों ने आंदोलन को तेज करने की चेतावनी देते हुए कहा है कि कानून वापसी के बिना वह आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।