चीतों की दहाड़ के लिए कूनो तैयार, बयान देकर ट्रोल हुए सिंधिया, कांग्रेस बोली- महाराज चीते मिमियाते हैं

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कूनो के जंगल नामीबिया से लाए गए चीतों की दहाड़ के लिए तैयार हैं, इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता सुहृद तिवारी ने कहा कि, महाराज... चीते मिमियाते हैं

Updated: Sep 17, 2022, 12:42 AM IST

चीतों की दहाड़ के लिए कूनो तैयार, बयान देकर ट्रोल हुए सिंधिया, कांग्रेस बोली- महाराज चीते मिमियाते हैं

भोपाल। "टाइगर स्टेट" मध्य प्रदेश में चीतों की एंट्री की तैयारियां पूरी हो चुकी है। शनिवार को पांच मादा और तीन नर अफ्रीकी चीतों को कूनो के जंगल में छोड़ जाएगा। बीजेपी सरकार इस विस्थापन को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है। इसी बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया चीतों को लेकर एक बयान देकर फंस गए है, जिसमें उन्होंने कहा कि चीते दहाड़ते हैं। अब कांग्रेस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि महाराज चीते दहाड़ते नहीं मिमियाते हैं।

केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बयान जारी कर कहा कि, 'मध्य प्रदेश के कुनो पालपुर के जंगल, नामीबिया से लाये गए चीतों की दहाड़ के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने जन्मदिन पर छोड़े जा रहे ये चीते, मध्य प्रदेश के लिए उपहार हैं जो यहाँ के वन्यजीवन को और समृद्ध करेंगे तथा पर्यटन और समृद्धि के नए द्वार खोलेंगे।'

कांग्रेस ने सिंधिया के इस बयान पर करारा पलटवार किया है। कांग्रेस नेता सुहृद तिवारी ने रिप्लाई करते हुए लिखा कि, 'महाराज! जीते दहाड़ते नहीं मिमियाते हैं।' तिवारी ने कहा कि, 'लगता है महाराज ने ईमान के साथ साथ अक्ल भी बेच दिया है।' दरअसल, चीतों की आवाज चिड़ियों के जैसी होती है। बड़े चीते थोड़े बहुत गुर्राते हैं तो कुत्ते के जैसी भी आवाज निकालते हैं। इसके अलावा, इनकी आवाज बिल्लियों से भी मिलती जुलती होती है।

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बता दें कि नामीबिया से 8 अफ्रीकी चीते 20 घंटे की यात्रा तय करके शनिवार को ग्वालियर पहुंचेंगे। यहां से उन्हें कूनो अभ्यारण्य में ले जाकर छोड़ा जाएगा। बीजेपी सरकार द्वारा इसे "मेगा इवेंट" बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा जा रहा है। हालांकि एक्सपर्ट्स कूनो के जंगलों में चीतों के गुजर बसर को लेकर आशंकित हैं। सबसे बड़ा चैलेंज ग्रास लैंड को लेकर है। चीतों की रफ्तार में पेड़ बाधा बनेंगे क्योंकि विस्तृत ग्रास लैंड में ही चीते अपना शिकार करते हैं। 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि एमपी में नामीबियाई चीतों को पग पग पर खतरों का सामना करना पड़ेगा। चीता अच्छा शिकारी है और उसकी रफ्तार का कोई सानी नहीं। लेकिन एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर इन चीतों का ही शिकार हो गया तो? मध्य प्रदेश में पशु तस्करों के कारनामे किसी से छिपे नहीं हैं। टाइगर स्टेट में हर वर्ष दर्जनों बाघों की संदिग्ध मौत होती है। ऐसे में इन तस्करों से चीतों को बचाए रखना बड़ी चुनौती होगी।