मुरैना सामूहिक नकल मामले पर जांच कमेटी गठित, खुलेआम मोबाइल से सवाल हल करते मिले नर्सिंग छात्र

मोबाइल पर गूगल खोलकर प्रैक्टिकल परीक्षाओं के सवाल हल कर रहे थे छात्र, वीडियो वायरल होने के बाद मचा था हड़कंप, NSUI मेडिकल विंग ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री सारंग पर लगाए गंभीर आरोप

Updated: Apr 03, 2022, 01:25 PM IST

मुरैना सामूहिक नकल मामले पर जांच कमेटी गठित, खुलेआम मोबाइल से सवाल हल करते मिले नर्सिंग छात्र

मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना में नर्सिंग कॉलेज की प्रैक्टिकल परीक्षा में सामुहिक नकल का मामला गरमा गया है। बवाल बढ़ने के बाद मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। NSUI मेडिकल विंग ने राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मेडिकल विंग का दावा है कि दूसरे राज्यों के छात्रों से मोटे पैसे लेकर मध्य प्रदेश के कॉलेजों द्वारा फर्जी डिग्री दी जा रही है।

दरअसल, नर्सिंग कॉलेजों में फर्स्ट ईयर के प्रैक्टिकल एग्जाम चल रहे हैं। प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए नर्सिंग के स्टूडेंट्स को जिला अस्पताल में मरीजों से मिलाया जाता है। इसके बाद कॉपी लिखने को दी जाती है। परीक्षा में धांधली यह हुई कि स्टूडेंट्स मोबाइल पर गूगल और वॉट्सऐप खोलकर सवालों के उत्तर लिख रहे थे। मुरैना में मोबाइल खोलकर परीक्षा देते छात्रों का वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मच गया।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नकलचियों में अधिकांश बिहार, झारखंड और यूपी के स्टूडेंट्स थे, जो मुरैना के नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ते हैं। इन छात्रों ने परीक्षा से पहले मुरैना के अपने नर्सिंग कॉलेजों को देखा तक नहीं था। छात्रों ने मीडिया को बताया कि उनसे एक साल के लिए दो से ढाई लाख रुपए फीस ली गई है। जबकि, हकीकत में फीस 30 हजार रुपए है। टीचिंग स्टाफ से इस तरह एग्जाम होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि बच्चे मरीजों से पूछ रहे हैं और मोबाइल में नोट कर रहे हैं, इसके बाद मोबाइल पर देखकर पेपर दे रहे हैं। 

वीडियो सामने आने के बाद पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा था कि मध्य प्रदेश नकलचियों का अड्डा बन चुका है। बवाल बढ़ने पर मुरैना सीएमएचओ डॉ राकेश शर्मा ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ विनोद गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही सीएमएचओ ने इन परीक्षाओं के साथ नर्सिंग कॉलेजों की जांच कराने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। शर्मा ने कहा कि इसका जिला प्रशासन से कोई संबंध नहीं है। यह परीक्षा चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा ही आयोजित की जाती हैं।

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मामले पर एमपी एनएसयूआई मेडिकल विंग के समन्यवयक रवि परमार ने कहा कि, 'मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए बाहरी प्रदेशों के स्टूडेंट्स के लिए एक निश्चित कोटा होता है। लेकिन, कॉलेज संचालक सीटें खाली होने का हवाला देकर अधिक से अधिक बाहरी छात्रों को दाखिला देते हैं। एजेंट्स दूसरे राज्यों के छात्रों से दो से ढाई लाख रुपए ले उन्हें पास कराने की गारंटी देकर यहां एडमिशन करा देते हैं। जबकि, फीस 25 से 30 हजार के बीच होती है। यह पूरा खेल चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के संरक्षण में चल रहा है और रकम का एक मोटा हिस्सा उन्हें दिया जाता है।'