MP: श्योपुर में डेढ़ साल की आदिवासी बच्ची की कुपोषण से मौत, सरकारी आंकड़ेबाजी की खुली पोल

महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों में कुपोषण मुक्त है जिला, मासूम की मौत से सामने आई सच्चाई, मामला रफा दफा करने में जुटा रहा स्वास्थ्य विभाग, दिग्विजय सिंह ने तीन महीने पहले ही सीएम को पत्र लिखकर कराया था अवगत

Updated: Aug 12, 2022, 10:48 PM IST

MP: श्योपुर में डेढ़ साल की आदिवासी बच्ची की कुपोषण से मौत, सरकारी आंकड़ेबाजी की खुली पोल

श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में गुरुवार को एक आदिवासी कुपोषित बच्ची की मौत हो गई। इस घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। राज्य सरकार का दावा है कि जिला कुपोषण मुक्त हो गया है। हालांकि, मासूम की मौत ने सभी आंकड़ेबाजी की पोल खोल दी है।

मामला श्योपुर जिला अस्पताल के एनआरसी केंद्र का है। यहां चार दिन पहले भर्ती कराई गई डेढ़ साल की मासूम बालिका देवकी आदिवासी की शुक्रवार सुबह मौत हो गई। इस कुपोषित बच्ची की मौत को छिपाने के लिए अधिकारियों ने तमाम कोशिशें की। हालांकि, स्थानीय पत्रकारों ने घटना को उजागर कर दिया। प्रशासन ने अलसुबह किसी को भनक लगे बगैर बच्ची के शव को वाहन से उसके गांव पहुंचा दिया।

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बताया गया कि देवकी का वजन 10 किलो होना चाहिए था, लेकिन कुपोषण की वजह से उसका वजन चार किलो से भी कम था। बच्ची को उपचार और पोषण के लिए आठ अगस्त को जिला अस्पताल के एनआरसी केंद्र में भर्ती कराया गया था। लेकिन कुपोषण की वजह से बच्ची की हालत ज्यादा नाजुक हो गई थी इस वजह से शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई। मृतक बच्ची के परिजनों का कहना है कि वह बुरी तरह कुपोषित थी।

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के लोग अभी भी इस बात के स्वीकार नहीं कर रहे हैं की बच्ची कुपोषित थी।श्योपुर जिले के सीएमएचओ डॉ बीएल यादव का कहना है कि बच्ची अंडरवेट थी। इस बात से कोई इनकार नहीं है, लेकिन जब हमने उसके माता-पिता से बात की तो पता चला कि देवकी को वृद्धि से जुड़ी कोई समस्या थी। जन्म के काफी देर बाद वह रोई थी। इतना ही नहीं वह खाना भी नहीं खा पा रही थी। देवकी से पहले उसकी मां को दो बच्चे हुए थे और दोनों पूरी तरह स्वस्थ है। देवकी में किसी कारण से वृद्धि संबंधित समस्या थी और ऐसा लगता है कि सेरेब्रल पाल्सी जैसी कोई दिक्कत थी, जिसकी वजह से वजन नहीं बढ़ रहा था। 

श्योपुर जिले में पिछले कुछ सालों तक 20 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण से ग्रसित थे, जिनमें से करीब 4 हजार बच्चे अति कुपोषित थे। अब महिला एवं बाल विकास विभाग ने नए आंकड़े पेश कर जिले से कुपोषण को लगभग गायब कर दिया है। लेकिन, डेढ़ साल की इस मासूम की मौत ने महिला बाल विकास विभाग के दावों के साथ-साथ उनकी आंकड़े बाजी की भी पोल खोल कर रख दी है। 

विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने ट्वीट किया, 'मध्यप्रदेश के श्योपुर में एक 18 महीने की बच्ची की कुपोषण से मौत की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। जिस प्रदेश में 35-35 करोड़ में माननीय ख़रीदकर  शिवराज ने सरकार बनाई है, उस प्रदेश में बच्ची भूख और कुपोषण से मर गई। “शर्म करो शवराज” 

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बता दें कि तीन महीने पूर्व ही राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कुपोषण की बढ़ती समस्या से अवगत कराते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कुपोषण के हैरान करने वाले आंकड़े साझा करते हुए इसके विरुद्ध लड़ाई में उचित कदम उठाने की मांग की थी। उन्होंने बताया था कि आंगनवाड़ियों में दर्ज 65 लाख बच्चों में से एक लाख बत्तीस हजार ठिगने हैं। इसी प्रकार छः लाख तीस हजार कम वजन के होकर कुपोषित हैं। दुबलापन के शिकार बच्चे 1 लाख 37 हजार है। औसत से कम उंचाई-लंबाई वाले बच्चे 2 लाख 64 हजार हैं। हालांकि, सीएम चौहान की ओर से इस पत्र का न कोई जवाब आया और न ही कोई कार्रवाई हुई, जिसका नतीजा सामने है।