MP पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, सरकार को दी नसीहत- आग से मत खेलिए

मध्य प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, SC ने राज्य सरकार को फटकारते हुए कहा है कि आग से मत खेलिए, वहीं चुनाव आयोग से कहा है कि संविधान के हिसाब से ही चुनाव कराएं

Updated: Dec 17, 2021, 09:48 PM IST

MP पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, सरकार को दी नसीहत- आग से मत खेलिए

नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने पंचायत चुनाव पर स्टे लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण को आधार बनाकर यह फैसला सुनाया है। साथ ही न्यायालय ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई है। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका की पैरवी दिग्गज वकील व कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा कर रहे थे।

जानकारी के मुताबिक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रदेश चुनाव आयोग को जमकर फटकार लगाई। सर्वोच्च न्यायालय ने इस दौरान राज्य सरकार से कहा कि ओबीसी आरक्षण मामले में आप आग से मत खेलें। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि चुनाव संविधान के हिसाब से हो तब ही कराएं।

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वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मध्यप्रदेश में आरक्षण रोटेशन का पालन नहीं किया गया। यह संविधान की धारा 243 C और D के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। मामले पर अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।

इसके पहले गुरुवार को हुए नाटकीय घटनाक्रम में जबलपुर हाईकोर्ट ने मामले को 3 जनवरी तक के लिए टाल दिया था। तत्काल सुनवाई से हाईकोर्ट के इनकार के बाद याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च अदालत की ओर रुख किया। सीजेआई एनवी रमना की बेंच ने इसे स्वीकारते हुए आज सुनवाई की तारीख तय की थी। 

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मामले में याचिकर्ता कांग्रेस पंचायत प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डीपी धाकड़ का कहना है कि नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि हर पांच साल में रोटेशन के आधार पर आरक्षण होगा। यानी जिन चुनाव क्षेत्रों में आरक्षण था उसे बदल दिया जाएगा। एमपी सरकार पुरानी आरक्षण व्यवस्था पर ही चुनाव चाहती है, जबकि याचिकाकर्ताओं ने इसे सरकार की मनमर्जी और संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी करार दिया है। इसी को लेकर मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचा। विपक्षी दल कांग्रेस ने भी आरोप लगाया था कि राज्य निर्वाचन आयोग पर दबाव डालकर चुनाव कार्यक्रम घोषित कराया गया, जिसमें आरक्षण प्रक्रिया पर एमपी सरकार का रवैय्या गलत है।