मंत्री विजय शाह की माफी मंजूर नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दो हफ्ते में फैसला लेने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि राज्य सरकार विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर कई महीनों से कोई फैसला नहीं ले रही है।

Updated: Jan 19, 2026, 09:36 PM IST

नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। शाह की ऑनलाइन माफी पर सोमवार को कोर्ट ने कहा कि इसमें अब बहुत देर हो गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर 2 हफ्ते के भीतर फैसला लें।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि राज्य सरकार विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर कई महीनों से कोई फैसला नहीं ले रही है। जबकि विशेष जांच दल ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

न्यायालय के आदेश पर कांग्रेस नेता अरुण यादव ने कहा कि जिस तरह देश की बिटिया कर्नल सोफिया कुरैशी के अपमान से जुड़े मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ सार्वजनिक हुई हैं, उन्हें देखकर यह आशंका और भी प्रबल होती है कि मंत्री विजय शाह ने संभवतः सरकार के संरक्षण में ही यह आपत्तिजनक आचरण किया, इस पूरे प्रकरण में तथ्य स्वयं बहुत कुछ कह रहे हैं । मंत्री के विरुद्ध स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने वाले मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के माननीय न्यायाधीश अतुल श्रीधरन का मामले के अंतिम निर्णय आने से पहले ही तबादला कर दिया जाना तथा मंत्री के विरुद्ध गठित एसआईटी की रिपोर्ट के बावजूद 5 महीनों में अभियोजन की स्वीकृति न दिया जाना, इन गंभीर शंकाओं को और बल देता है।

बता दें कि पिछले साल 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था, 'उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।' शाह ने आगे कहा था, 'अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।'