MP में 1 लाख से ज्यादा सफाईकर्मियों की स्ट्राइक, सैलरी बढ़ाने समेत 4 सूत्री मांगों पर अड़े
मध्य प्रदेश में एक लाख से अधिक सफाईकर्मी चार सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। भोपाल समेत कई शहरों में कचरा कलेक्शन और सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में सफाई व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रदेशभर के एक लाख से अधिक सफाईकर्मियों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसका असर राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में दिखाई देने लगा है। घरों से कचरा उठाने वाली गाड़ियां बंद होने के कारण सड़कों और बाजारों में गंदगी जमा हो रही है। गुरुवार को भी डोर टू डोर कचरा कलेक्शन प्रभावित रहने की आशंका है।
सफाईकर्मियों की यूनियन ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सभी सफाईकर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम मासिक वेतन 25 हजार रुपये करने, ठेका प्रथा समाप्त कर कर्मचारियों को नियमित करने और किसी सफाईकर्मी की मृत्यु होने पर उसके पति या पत्नी में से एक को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग शामिल है। यूनियन का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
भोपाल में इस आंदोलन में 10 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी शामिल हैं। शहर में कचरा उठाने के लिए तैनात 400 से अधिक वाहन गार्बेज स्टेशनों पर खड़े हैं। इससे घरों से कचरा एकत्र करने और उसे निस्तारण केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था प्रभावित हो गई है। बुधवार को न्यू मार्केट सहित कई व्यावसायिक क्षेत्रों में व्यापारियों ने स्वयंसेवकों की मदद से सफाई कराई। व्यापारियों ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
हड़ताल का असर विदिशा जिले के सिरोंज में भी देखने को मिला। सफाईकर्मियों के काम बंद करने से सड़कों पर कचरा फैल गया और लोगों को परेशानी होने लगी। स्थिति को देखते हुए स्थानीय विधायक उमाकांत शर्मा बुधवार रात खुद सफाई के लिए सड़क पर उतर आए। उन्होंने करीब दो घंटे तक झाड़ू लगाकर सफाई की।
राजधानी में सामान्य दिनों में रोजाना लगभग 850 टन कचरा निकलता है। इसके संग्रहण के लिए 400 से ज्यादा डोर टू डोर कलेक्शन वाहन लगाए गए हैं। प्रत्येक वाहन दिन में दो से तीन फेरे लगाता है। शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों पर एकत्र कचरे को कैप्सूल टैंकरों के माध्यम से आदमपुर छावनी स्थित निस्तारण केंद्र भेजा जाता है।
सफाईकर्मियों की हड़ताल के चलते इस पूरी व्यवस्था पर असर पड़ा है। घरों से कचरा नहीं उठने के साथ सड़कों की नियमित सफाई भी बंद है। ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर शहर में कचरे का ढेर बढ़ने की आशंका है।
हड़ताल समाप्त कराने के लिए यूनियन के पदाधिकारियों ने नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे से मुलाकात की थी। हालांकि, इस बैठक में मांगों पर सहमति नहीं बन सकी थी। बातचीत बेनतीजा रहने के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया।
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक, संगठन के पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से हड़ताल का फैसला किया है। यूनियन का दावा है कि प्रदेश के 16 नगरीय निकायों और 374 नगर परिषदों के एक लाख से अधिक कर्मचारी आंदोलन में शामिल हैं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि चारों मांगें पूरी होने तक काम पर वापसी नहीं होगी।
हड़ताल से पहले मंगलवार को भी भोपाल में सफाईकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। कर्मचारी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन उनका आरोप है कि ज्ञापन लेने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की योजना बनाई।
पुलिस ने जहांगीराबाद चौराहे पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया था। इसके विरोध में कर्मचारी करीब दो घंटे तक सड़क पर बैठे रहे। जिससे यातायात प्रभावित हुआ। बाद में समझाइश के बाद उन्होंने रास्ता खाली कर दिया लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं किया।
जहांगीराबाद चौराहे से हटने के बाद कर्मचारियों ने शाहजहांनी पार्क में अपना धरना जारी रखा। उनका कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिला है। यूनियन ने सरकार से मांगें पूरी करने की अपील की है और साफ कर दिया है कि लिखित या ठोस समाधान मिलने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।




