MP: सिंगरौली में रेत माफिया की गुंडागर्दी, बंदूक की नोक पर जब्त वाहन छुड़ाकर फरार
सिंगरौली जिले में रेत माफिया ने पुलिस और वन विभाग को खुली चुनौती देते हुए थाने के सामने जब्त रेत से भरा ट्रिपर हथियारों के दम पर छुड़ा लिया।
सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अवैध रेत कारोबार से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां हथियारबंद बदमाशों ने पुलिस और वन विभाग की मौजूदगी में जब्त किया गया रेत से भरा ट्रिपर वाहन छुड़ाकर फरार हो गए। घटना ने कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना चितरंगी थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम ने प्रतिबंधित क्षेत्र से अवैध रूप से रेत परिवहन कर रहे एक ट्रिपर को पकड़कर जब्त किया था। वाहन को थाने में सुरक्षित खड़ा कराने के लिए लाया जा रहा था। इसी दौरान देर रात अचानक कई लोग वाहनों से मौके पर पहुंचे और हालात तनावपूर्ण हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरोपियों के हाथों में हथियार थे और उन्होंने वन अमले को खुलेआम धमकाना शुरू कर दिया था। बंदूक लहराते हुए गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की गई। आरोप है कि वनरक्षक को वाहन से कुचलने तक की धमकी दी गई थी। देखते ही देखते दबंगों ने जब्त ट्रिपर अपने कब्जे में लिया और मौके से लेकर फरार हो गए। जबकि, पूरी घटना पुलिस की मौजूदगी में थाने के सामने ही होती रही।
वन विभाग की टीम ने यह कार्रवाई सोन घड़ियाल अभ्यारण क्षेत्र से अवैध रेत उत्खनन की सूचना मिलने के बाद की थी। शिकायत में बताया गया कि प्रतिबंधित इलाके से लगातार रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान पकड़े गए ट्रिपर को थाने लाया जा रहा था। तभी कथित तौर पर वाहन मालिक सूर्यांश सिंह और चालक दीपक पटेल निवासी सुदा गांव अपने साथियों के साथ पहुंचे और वाहन छुड़ा लिया।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि कुछ समय तक थाना गेट के सामने विवाद और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा था। आरोपियों के भागने के बाद पुलिस ने उनका पीछा भी किया था लेकिन वे पकड़ में नहीं आ सके।
घटना के बाद वनरक्षक की शिकायत पर पुलिस ने दो नामजद आरोपियों सहित कई अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी सुदेश तिवारी के अनुसार, ट्रिपर की तलाश जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
हालांकि, इस पूरी वारदात ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। जैसे थाने जैसी सुरक्षित जगह पर हथियारबंद लोग कैसे पहुंच गए, पुलिस तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं कर सकी और क्या कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर दबाव या मिलीभगत की आशंका तो नहीं है? साथ ही यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि घटना के दौरान सीसीटीवी कैमरे सक्रिय थे या नहीं और आरोपियों की पहचान कितनी स्पष्ट हो चुकी है।




