सभी धर्मांतरण अवैध नहीं, सुप्रीम कोर्ट से मध्य प्रदेश सरकार को झटका, हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार

जस्टिस एम.आर. शाह और सी.टी. रविकुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि सभी धर्मांतरण को अवैध नहीं कहा जा सकता है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

Updated: Jan 04, 2023, 02:42 PM IST

सभी धर्मांतरण अवैध नहीं, सुप्रीम कोर्ट से मध्य प्रदेश सरकार को झटका, हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार

नई दिल्ली/भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण रोधी कानून पर मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि सभी धर्मांतरण अवैध नहीं हैं। सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट को सूचित किए बिना शादी करने वाले अंतर्धार्मिक जोड़ों पर मुकदमा चलाने से रोक लगाई गई थी। 

शीर्ष अदालत ने मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई को 7 फरवरी के लिए टाल दिया है। जस्टिस एम.आर. शाह और सी.टी. रविकुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि सभी धर्मांतरण को अवैध नहीं कहा जा सकता है। राज्य सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर अवैध धर्मांतरण के लिए शादी का इस्तेमाल किया जाता है, तो सरकार आंख नहीं मूंद सकती है। उन्होंने तर्क कि शादी या धर्मांतरण पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इसके लिए केवल जिलाधिकारी को सूचित करना आवश्यक है।

यह भी पढ़ें: MP में बीजेपी नेता की दरिंदगी, 12 साल की बच्ची को बनाया अपनी हवस का शिकार

तुषार मेहता ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, हालांकि शीर्ष अदालत ने कोई निर्देश पारित करने से इनकार कर दिया। दरअसल, हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में राज्य सरकार को मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 10 के तहत उन वयस्कों पर मुकदमा नहीं चलाने का निर्देश दिया था, जो अपनी मर्जी से शादी करते हैं। हाईकोर्ट ने 14 नवंबर को कहा कि धारा 10, जो धर्मांतरण के इच्छुक नागरिक के लिए जिला मजिस्ट्रेट को इस संबंध में घोषणा पत्र देना अनिवार्य बनाती है हमारी राय में यह असंवैधानिक है।

बता दें कि मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम (एमपीएफआरए), 2021 की धारा 10 के प्रावधान के अनुसार धर्मांतरण करने का इरादा रखने वाले व्यक्तियों और धर्मांतरण करने वाले पुजारी को अपने इरादे के बारे में 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होगा। ऐसा नहीं होने पर व्यस्कों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कि जाएगी। उच्च न्यायालय ने इसे असंवैधानिक करार दिया है।