अनाथ बच्चों की देखभाल के लिए हर ज़िले में नियुक्त होगा पालक अधिकारी, सीएम शिवराज की घोषणा

सोमवार को मुख्यमंत्री ने कोविड 19 बाल सेवा योजना के अंतर्गत करीब 328 बाल हितग्राहियों के खाते में पैसे ट्रांसफर किए, इसी दौरान उन्होंने घोषणा की कि अनाथ बच्चों के लिए हर ज़िले में पालक अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी

Updated: Jul 20, 2021, 10:43 AM IST

अनाथ बच्चों की देखभाल के लिए हर ज़िले में नियुक्त होगा पालक अधिकारी, सीएम शिवराज की घोषणा

भोपाल। कोरोना काल में शिवराज सरकार की योजनाएं लोगों तक नहीं पहुंच पाने के आरोपों के बीच सोमवार को मुख्यमंत्री ने कोविड 19 बाल सेवा योजना के अंतर्गत अनाथ बच्चों के खातों में राशि ट्रांसफर की। मुख्यमंत्री ने 328 बाल हितग्राहियों के खाते में कुल 16 लाख 40 हजार की राशि ट्रांसफर की। इसी दौरान सीएम ने यह घोषणा की कि प्रदेश में अनाथ हुए बच्चों की देखभाल के लिए हर ज़िले में एक पालक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। 

मुख्यमंत्री ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि भला एक जागरूक समाज के रहते हुए कोई अनाथ कैसे रह सकता है? सीएम शिवराज ने कहा कि अनाथ बच्चों की देखभाल के लिए हर जिले में एक पालक अधिकारी को नियुक्त होगा ही, लेकिन इसके साथ ही अगर किसी बच्चे को कोई जरूरत महसूस होगी तो उसकी मदद के लिए जिले के कलेक्टर तैयार रहेंगे। 

यह भी पढ़ें : ये सरकार 1 लाख तो क्या 50 हज़ार भी नहीं देगी, सरकार के खोखले दावों का शिकार लोगों ने साझा किया अपना दर्द

मुख्यमंत्री ने बच्चों से संवाद करते हुए उन्हें उन महान हस्तियों की याद दिलाई जो अपने माता पिता को बचपन में ही खो चुके थे। मुख्यमंत्री ने स्वामी विवेकानंद, नेल्सन मंडेला, गोस्वामी तुलसीदास और जॉर्ज वॉशिंगटन सहित कई उदाहरण देते हुए बच्चों से कहा कि इन सभी लोगों ने बेहद कम उम्र में अपने माता पिता को खो दिया था। लेकिन इन लोगों ने कभी हार नहीं मानी, इन्होंने अपने अपने क्षेत्रों में दुनिया को नई दिशा दिखाने का काम किया। 

कोरोना की दूसरी लहर से मध्य प्रदेश बुरी तरह से प्रभावित रहा। लोग अस्पताल में बिस्तर और ऑक्सीजन को लेकर तरसते रहे। सरकारी लापरवाही और कुप्रबंधन ने प्रदेश के कई बच्चों के सिर से उनके माता पिता साया उठा दिया। इसके बाद राज्य सरकार अनाथ बच्चों के लिए अपनी योजना लेकर आई। जिसके अंतर्गत अपने माता पिता या परिवार के कमाने वाले मुख्य सदस्य को खोने वाले बच्चों को पांच हजार रुपए प्रति माह, राशन और शिक्षा की जिम्मेदारियां राज्य सरकार को निभानी हैं।