CBSE के छात्र अब नहीं पढ़ेंगे मशहूर शायर फैज अहमद फैज के शेर, सिलेबस से हटाने का फैसला

सीबीएसई ने एनसीईआरटी की कक्षा 10 की राजनीति विज्ञान की किताब से फैज़ अहमद फैज़ की शायरी के कुछ अंशों समेत लोकतंत्र, लोकतंत्र के सामने चुनौतियां समेत प्रमुख संघर्ष और आंदोलन वाले अध्यायों को हटाने का फैसला किया है

Updated: Apr 24, 2022, 09:11 AM IST

CBSE के छात्र अब नहीं पढ़ेंगे मशहूर शायर फैज अहमद फैज के शेर, सिलेबस से हटाने का फैसला

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नए सत्र के लिए पाठ्यक्रम की घोषणा कर दी है। करीब एक दशक से ज्यादा समय के बाद सीबीएसई ने एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में कई बड़े बदलाव किए हैं जिसे लेकर अब विवाद शुरू हो गया है। सीबीएसई ने एनसीईआरटी की कक्षा 10 की राजनीति विज्ञान की किताब से फैज़ अहमद फैज़ की शायरी के कुछ अंशों समेत लोकतंत्र, लोकतंत्र के सामने चुनौतियां समेत प्रमुख संघर्ष और आंदोलन वाले अध्यायों को हटाने का फैसला किया है।

दरअसल, अपने नए सिलेबस में CBSE ने कक्षा 10वीं की समाज विज्ञान की पुस्तक से शायर फैज अहमद फैज की शायरी और 11वीं की इतिहास पुस्तक से इस्लाम की स्थापना, उसके उदय और विस्तार की कहानी को हटा दिया है और 12वीं की किताब से मुगल साम्राज्य के शासन-प्रशासन पर एक अध्याय में बदलाव किया गया है। बोर्ड ने 11वीं औऱ 12वीं क्लास के सिलेबस से गुटनिरपेक्ष आंदोलन, शीत युद्ध का युग, अफ्रीकी-एशियाई क्षेत्रों में इस्लामी साम्राज्यों के उदय, मुगल दरबारों के इतिहास और औद्योगिक क्रांति के चैप्टर को हटा दिया है। 

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जानकारी के मुताबिक कक्षा 10वीं की 'लोकतांत्रिक राजनीति' नामक पुस्तक में चौथा अध्याय 'जाति, धर्म और लैंगिक मसले' है। इसके तहत एक उप-शीर्षक 'धर्म, संप्रदाय और राजनीति' है जिसमें सांप्रदायिकता के बारे में बताया गया है। बच्चों को सांप्रदायिकता में राजनीति की भूमिका समझाने के लिए तीन कार्टून दिए गए हैं। पहले दो कार्टून में फैज की एक-एक शायरी भी लिखी है। वहीं, तीसरा कार्टून अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया है। इनमें फैज की शायरी वाले पहले दोनों कार्टून हटा दिए गए हैं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने भी 'लोकतंत्र और विविधता' के चैप्टर को भी हटा दिया है।  इन चैप्टर को हटाए जाने के मुद्दे पर अधिकारियों ने कहा कि चैप्टर में किए गए परिवर्तन राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCRT) की सिफारिशों के अनुरूप हैं। CBSE द्वारा कोर्स में किए गए बदलाव को लेकर कहा जा रहा है कि 2022-23 के एकेडमिक सेशन में बोर्ड एक बार फिर से एक ही टर्म में एग्जाम देने की योजना बना रहा है। हालांकि अभी तक इसके बारे में घोषणा नहीं कि गई है।