पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर करने की कवायद, केंद्र ने 10 रुपए घटाई एक्साइज ड्यूटी
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर आम जनता को राहत दी है। पेट्रोल पर ड्यूटी 13 से घटाकर 3 रुपए और डीजल पर शून्य कर दी गई।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की है। पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए कर दी गई है। जबकि, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
दरअसल, इजराइल-ईरान संघर्ष के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इस तेजी का सीधा असर भारत की तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। उन्हें बढ़ती लागत के कारण भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालात ऐसे बन रहे थे कि कंपनियों को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पड़ते। जिसकी वजह से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता। इसी को देखते हुए सरकार ने टैक्स में कटौती कर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत में सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल पेट्रोल पर करीब 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 30 रुपए प्रति लीटर का घाटा उठा रही हैं। ऐसे में एक्साइज ड्यूटी में कमी से कंपनियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
इस बीच निजी क्षेत्र की कंपनी नायरा एनर्जी ने हाल ही में अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं। कंपनी ने पेट्रोल में 5 रुपए और डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की है। जिसके बाद भोपाल में इसके पेट्रोल की कीमत 111.72 रुपए और डीजल 94.88 रुपए प्रति लीटर हो गई है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट और स्थानीय करों के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है।
दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में ईरान से जुड़े मौजूदा वैश्विक हालात और उनके संभावित असर पर चर्चा की जाएगी। इससे पहले 24 मार्च को राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी थी कि यदि यह संघर्ष लंबा चला तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और देश को कोविड-19 जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार ने साथ ही यह स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल या गैस की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, भारत के पास लगभग 60 दिनों की खपत के बराबर ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
गौरतलब है कि एक्साइज ड्यूटी एक अप्रत्यक्ष कर होता है जो देश के भीतर निर्मित वस्तुओं पर लगाया जाता है। पेट्रोल-डीजल के मामले में यह टैक्स रिफाइनरी से निकलने के बाद प्रति लीटर के हिसाब से वसूला जाता है। चूंकि यह दर निश्चित होती है इसलिए सरकार इसे घटाकर उपभोक्ताओं को राहत दे सकती है या बढ़ाकर राजस्व में इजाफा कर सकती है। वर्तमान कटौती से जहां सरकार के राजस्व पर असर पड़ेगा वहीं तेल कंपनियों के नुकसान को कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी।




