एवरेस्ट के 4 मसाले लैब टेस्ट में फेल, जांच में बैक्टीरिया और पेस्टिसाइड्स सीमा से ज्यादा पाए गए

लोकप्रिय ब्रांड एवरेस्ट के गरम मसाला, किचन किंग और मीट मसाला समेत चार उत्पादों में लैब जांच के दौरान खतरनाक कीटनाशक और बैक्टीरिया पाए गए हैं।

Updated: Mar 10, 2026, 07:05 PM IST

लोकप्रिय मसाला ब्रांड एवरेस्ट के कुछ उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। 1 मार्च 2026 को यूट्यूब पर अपलोड किए गए एक वीडियो में दावा किया गया कि कंपनी के चार मसाले लैब जांच में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें एवरेस्ट गरम मसाला, किचन किंग मसाला, कश्मीरी लाल चिली पाउडर और मीट मसाला शामिल हैं। वीडियो के मुताबिक, इन मसालों में कुछ बैक्टीरिया और कीटनाशकों की मात्रा निर्धारित सुरक्षा सीमा से अधिक पाई गई है।

वीडियो में बताया गया कि जांच के लिए इन मसालों को एक डी मार्ट स्टोर से खरीदा गया था। चैनल ने हर उत्पाद के तीन-तीन पैक खरीदे और उनमें से एक पैक को स्वतंत्र लैब में परीक्षण के लिए भेजा। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि ये मसाले FSSAI द्वारा तय किए गए खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं या नहीं। टेस्ट के नतीजे सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

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रिपोर्ट के अनुसार, एवरेस्ट गरम मसाला के नमूने में दो कीटनाशक एसिटामिप्रिड और एज़ोक्सीस्ट्रोबिन अनुमत सीमा से अधिक पाए गए हैं। इसके अलावा इसमें एंटेरोबैक्टीरियेसी नामक बैक्टीरिया की मात्रा भी तय सीमा से ज्यादा बताई गई है। इसी तरह एवरेस्ट किचन किंग मसाला में भी एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया अधिक मात्रा में पाया गया है। जबकि, तीन कीटनाशक थियामेथॉक्सम, कार्बेन्डाजिम/बेनोमिल और कार्बेन्डाजिम सुरक्षित सीमा से ऊपर बताए गए हैं।

एवरेस्ट कश्मीरी लाल चिली पाउडर के मामले में रिपोर्ट में यह कहा गया कि इसमें कीटनाशकों की मात्रा निर्धारित सीमा से ज्यादा नहीं थी लेकिन इसमें भी एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया की मात्रा अपेक्षा से अधिक पाई गई हैं। वहीं, चौथे उत्पाद एवरेस्ट मीट मसाला में भी बैक्टीरिया की अधिक मौजूदगी दर्ज की गई है। इसके साथ ही इसमें चार कीटनाशक एथियन, टेबुकोनाजोल, एजोक्सीस्ट्रोबिन और फ्लूओपायरम तय सीमा से ज्यादा पाए जाने का दावा किया गया है।

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खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया एक बड़ा बैक्टीरिया समूह है जिसमें ई कोलाई, साल्मोनेला और क्लेबसिएला जैसे सूक्ष्मजीव शामिल होते हैं। दिल्ली स्थित धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में जीआई सर्जरी और जीआई ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. नीरज गोयल के मुताबिक, ये बैक्टीरिया सामान्यतः मानव आंत में पाए जाते हैं लेकिन यदि खाद्य पदार्थों में इनकी मात्रा अधिक हो जाए तो यह खाद्य में अशुद्धि का संकेत हो सकता है।

डॉ. गोयल के अनुसार, मसालों में एंटेरोबैक्टीरियेसी की अधिक मौजूदगी इस बात की ओर इशारा कर सकती है कि मसालों को सही तरीके से साफ या सुखाया नहीं गया या फिर प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के दौरान स्वच्छता के मानकों का पालन ठीक से नहीं हुआ हो। यदि ऐसे उत्पादों का लंबे समय तक अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो इससे दस्त, उल्टी, पेट दर्द, फूड पॉइजनिंग और पाचन संबंधी संक्रमण हो सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।

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इसी तरह मसालों में कीटनाशकों की अधिक मात्रा पाए जाने का अर्थ यह भी हो सकता है कि खेती के दौरान रसायनों का इस्तेमाल नियंत्रित ढंग से नहीं किया गया या फसल कटाई के बाद उनकी सही सफाई नहीं की गई हो। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शरीर में लंबे समय तक ऐसे रसायनों का जमाव होता रहे तो इससे लिवर, आंतों और तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि अलग-अलग कीटनाशकों के शरीर पर अलग प्रभाव हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर एसिटामिप्रिड लंबे समय में नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। जिसकी वजह से सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एजोक्सीस्ट्रोबिन फंगीसाइड लिवर और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। जबकि, थियामेथॉक्सम नसों पर असर डाल सकता है और अधिक एक्सपोजर की स्थिति में चक्कर या कमजोरी महसूस हो सकती है। इसी तरह एथियन जैसे कीटनाशक से उल्टी, उबकाई और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

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