सत्यपाल मलिक का केंद्र पर निशाना, कुत्तों के मरने पर होता है शोक, लेकिन किसानों के मरने पर नहीं जताते संवेदना

सत्यपाल मलिक ने जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मोदी सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला, सत्यपाल मलिक ने कहा कि सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट से ज्यादा बेहतर तब होता जब एक विश्व स्तरीय कॉलेज बना दिया गया होता

Publish: Nov 08, 2021, 09:44 AM IST

सत्यपाल मलिक का केंद्र पर निशाना, कुत्तों के मरने पर होता है शोक, लेकिन किसानों के मरने पर नहीं जताते संवेदना

नई दिल्ली/जयपुर। मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सत्यपाल मलिक ने एक कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला है। मलिक ने आंदोलनरत किसानों को मृत्यु पर भाजपा और सरकार के तमाम बड़े नेताओं द्वारा संवेदना प्रकट न किए जाने को लेकर भी आपत्ति जताई। मलिक ने बिना किसी का नाम लिए हुआ कहा कि कुछ नेता तो कुत्तों तक के मरने पर शोक प्रकट कर डालते हैं, लेकिन 600 किसानों की मृत्यु पर उनके पास प्रकट के लिए संवेदना ही नहीं है। 

सत्यपाल मलिक ने कहा कि जब एक कुत्ते तक की मौत होती है तो दिल्ली के नेताओं का शोक संदेश जाता है, लेकिन यहां आंदोलन में 600 किसान मर गए, लेकिन संसद में एक शोक संदेश तक पारित नहीं किया गया। सत्यपाल मलिक ने यह भी कहा कि उन्हें पद से हटाए जाने का डर नहीं है। वे किसानों के समर्थन में अपने राज्यपाल के पद तक का त्याग कर देंगे। 

सत्यपाल मलिक ने कहा कि दो तीन नेताओं ने ही उन्हें राज्यपाल बनाया है, वे जब कह देंगे मलिक अपना इस्तीफा भेज देंगे। सत्यपाल मलिक ने कहा कि वे पूरी तरह से आंदोलनरत किसानों के साथ हैं। सत्यपाल मलिक ने यह भी कहा कि खुद इस मसले पर उनकी प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत हुई थी। जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को यह सुझाव दिया था कि एमएसपी की गारंटी के ज़रिए इसका समाधान किया जा सकता है। सत्यपाल मलिक ने यह भी कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को सिखों और जाटों से दुश्मनी मूल न लेने की हिदायत दी थी। 

राज्यपाल मालिक ने मोदी सरकार के सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट को भी गैर जरूरी करार दिया। मलिक ने कहा कि इसके बदले एक विश्व स्तरीय कॉलेज का भी निर्माण किया जा सकता था। सत्यपाल मलिक ने बीजेपी में अपने विरोधियों का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनके कुछ शुभचिंतक हैं जो इस ताक में रहते हैं कि मलिक कब विरोध में बोलें और उन्हें पद से हटाया जा सके। मलिक ने कहा कि वे जन्म से राज्यपाल नहीं हैं, इसलिए उन्हें पद खोने का डर कभी नहीं सताता।