नहीं रोक पाई सलाखें, जेल से चुनाव जीत गए एक्टिविस्ट अखिल गोगोई, UAPA के तहत सालभर से हैं कैद

असम के शिबसागर से किसान नेता अखिल गोगोई का निर्दलीय ताल ठोंकना रहा सफल, बीजेपी उम्मीदवार को दी पटखनी, CAA को लेकर केंद्र के खिलाफ उठाई थी आवाज

Updated: May 03, 2021, 01:37 PM IST

नहीं रोक पाई सलाखें, जेल से चुनाव जीत गए एक्टिविस्ट अखिल गोगोई, UAPA के तहत सालभर से हैं कैद
Photo Courtesy: Sabrang

शिबसागर। असम के शिबसागर विधानसभा क्षेत्र से सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई चुनाव जीतने में कामयाब हुए हैं। सालभर से जेल में बंद अखिल ने विधानसभा चुनाव में निर्दलीय ताल ठोंका था। उन्होंने अपने निकटतम बीजेपी उम्मीदवार सुरभि राजकुंवर को 9 हजार मतों के अंतर से पटखनी दी है। गोगोई ने नागरिकता कानून के खिलाफ असम में केंद्र सरकार के खिलाफ बिगुल फूंका था। इसी वजह से उन्हें राष्ट्रद्रोही करार देते हुए सरकार ने UAPA के तहत जेल में डाल दिया था।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अखिल गोगोई की इस जीत में उनकी मां प्रियदा गोगोई ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चूंकि, जेल में बंद होने के कारण अखिल चुनाव प्रचार नहीं कर सकते थे, ऐसे में उनकी मां ने प्रचार का कमान संभाला। प्रियदा द्वारा अपने बेटे के पक्ष में किया गया भावनात्मक प्रचार रंग लाया और जनता ने उन्हें अपना विधायक चुना। 

अखिल गोगोई ने बीते दिनों केंद्रीय जांच एजेंसी NIA पर सनसनीखेज आरोप लगाया था। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन करने के चलते बीते एक साल से जेल में बंद गोगोई ने चिट्ठी लिखकर कहा कि एनआईए ने उन्हें जमानत के बदले RSS ज्वॉइन करने का प्रस्ताव दिया था। गोगोई का कहना है कि एनआईए अधिकारियों ने उन्हें धमकी दी कि यदि वे RSS से नहीं जुड़ेंगे तो फिर 10 साल जेल में कैद रहना होगा।

जेल में दी गई यातनाएं

गोगोई की नवगठित पार्टी रायजोर दल द्वारा जारी पत्र में यह खुलासा किया गया था कि गोगोई को अदालत की अनुमति के बिना 18 दिसंबर, 2019 को दिल्ली ले जाया गया था। यहां उन्हें गंभीर यातनाएं दी गईं।उन्हें तीन-चार डिग्री सेल्सियस तापमान में जमीन पर सुलाया गया। गोगोई का आरोप है कि एनआईए अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान उन्हें आरएसएस में शामिल होने पर तत्काल जमानत दिए जाने का प्रस्ताव दिया था। 

इतना ही नहीं गोगोई ने बताया कि एनआईए अधिकारियों ने उन्हें बीजेपी में शामिल होकर मंत्री बनने तक का ऑफर दिया। हालांकि, उन्होंने इस प्रस्ताव को अपमानजनक करार देते हुए ठुकरा दिया।गोगोई ने यह भी दावा किया है कि एनआइए के अधिकारियों उन्हें केएमएसएस छोड़कर एक एनजीओ खोलने का भी प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव के तहत उन्हें असम के लोगों के इसाई धर्म में धर्मांतरण के खिलाफ काम करना होगा। इसके लिए उनके एनजीओ को 20 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। 

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अखिल का आरोप है कि उन्होंने जब इन सभी प्रस्तावों को एक के बाद एक ठुकरा दिया तब एनआईए अधिकारियों ने उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। अखिल को कहा गया कि उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इतनी शारिरिक और मानसिक यातनाएं सहने के बावजूद वे टस से मस नहीं हुए। बता दें कि सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान 12 दिसंबर, 2019 को अखिल गोगोई को जोरहाट से गिरफ्तार किया गया था। 13 दिसंबर को असम पुलिस ने उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया और 14 दिसंबर जांच का जिम्मा एनआईए को सौंपा गया। NIA ने गोगोई के खिलाफ आरोप लगाया है कि उन्होंने सरकार के खिलाफ नफरत भड़काई है।