जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल के तापमान में होगी बढ़ोतरी, रिपोर्ट का दावा कुछ वर्षों में चढ़ जाएगा वादियों का पारा

कटते जंगलों और ग्लोबल वार्मिंग का तापमान पर पड़ेगा असर, भारतीय वनों में जलवायु परिवर्तन हॉटस्पॉट की मैपिंग पर आधारित सर्वे की रिपोर्ट में खुलासा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पश्चिम बंगाल, गोवा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में मिलेगी थोड़ी राहत

Updated: Jan 14, 2022, 02:59 PM IST

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल के तापमान में होगी बढ़ोतरी, रिपोर्ट का दावा कुछ वर्षों में चढ़ जाएगा वादियों का पारा
Photo Courtesy: financial express

अगले कुछ वर्षों में देश के उत्तरी भागों का तापमान बढने की संभावना है। सरकार द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा दावा किया गया है कि सन 2030, 2050 और 2085 तक लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तापमान में उच्च स्तर पर बढ़ोतरी होगी। वहीं दूसरी तरफ जब देश के उत्तरी भाग में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज होगी उस अवधि में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पश्चिम बंगाल, गोवा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में सबसे कम तापमान बढ़ने की संभावना है।यह सर्वे भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) ने बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस याने बिट्स पिलानी, गोवा के सहयोग से करवाया है। यह सर्वे भारतीय वनों में जलवायु परिवर्तन हॉटस्पॉट की मैपिंग पर आधारित है।

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य की समय अवधि के लिए तापमान और वर्षा डेटा के कंप्यूटर मॉडल-आधारित प्रक्षेपण का उपयोग करते हुए, भारत में वन कवर पर जलवायु हॉटस्पॉट्स को मैप करने के उद्देश्य से सहयोगात्मक अध्ययन किया गया था।  इस स्टडी में साल 2030, 2050, 2085 में परिदृश्यों का विश्लेषण किया गया जिसमें पाया गया है कि लद्दाख, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे ठंड़े प्रदेशों में तापमान में उच्च वृद्धि का अनुमान है। रिपोर्ट की मानें तो आगामी समय में भारत के नार्थ ईस्ट के राज्यों और ऊपरी मालाबार तट पर बारिश में भी सबसे ज्यादा वृद्धि का अनुमान जताया गया है। जबकि उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, देश के उत्तर-पश्चिमी भागों जैसे लद्दाख, जम्मू और कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कम से कम वृद्धि और कभी-कभी वर्षा में गिरावट का भी अनुमान है।

कार्बन उत्सर्जन और ग्रीन हाउस गैसें की पड़ रहा असर

वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड सहित ग्रीनहाउस गैसों के स्तर में वृद्धि से औसत वैश्विक वायुमंडलीय तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार तापमान में वृद्धि की वजह से मौसम चक्र बिगड़ रहा है। अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक घटनाएं हो रही हैं। जिसकी वजह से पारिस्थितिक तंत्र और दूसरी जैविक प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ रहा है। इस स्टड़ी में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन मौसम के पैटर्न पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। जिससे लोगों की खेती और सार्वजनिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है।

साल 2021 में भी हुई है 1 डिगी सेल्सियस की वृद्धि

IPCC की साल 2021 की रिपोर्ट में बताया गया था कि पूर्व-औद्योगिक समय की तुलना में औसत वैश्विक तापमान 1 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ चुका है। हमारे जंगल क्लाइमेट चेंज का असर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे कार्बन का सबसे बड़ा स्थलीय भंडार हैं। और कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसेज का स्रोत बन जाते हैं। लगातार कम हो रहे जंगलों की वजह से मुश्किलें बढ़ रही हैं। जरूरी है कि जंगलों को काटने, जलने और नष्ट होने से बचाया जाए।

 भारत कम करना चाहता है कार्बन उत्सर्जन

भारत का लक्ष्य 2030 तक अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2.5 से 3 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य हासिल करना है। मौजूदा आकलन के तहत देश के जंगल में कुल कार्बन स्टॉक 7,204 मिलियन टन होने का अनुमान है। 2019 के अंतिम आकलन की अपेक्षा देश के कार्बन स्टॉक में 79.4 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। वहीं मृदा कार्बनिक कार्बन SOC वनों में कार्बन स्टॉक के सबसे बड़े पूल का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका अनुमान 4,010.2 मिलियन टन है।

मृदा कार्बनिक कार्बन SOC देश के कुल वन कार्बन स्टॉक में 56 प्रतिशत का योगदान करता है। अरुणाचल प्रदेश में अधिकतम 1023.84 मिलियन टन मिट्रिक टन कार्बन स्टॉक है।  इसके बाद मध्य प्रदेश में 609.25 mt, छत्तीसगढ़ में 496.44 mt और महाराष्ट्र में 451.61 mt है। देश के विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों में प्रति हेक्टेयर कार्बन स्टॉक से पता चलता है कि जम्मू और कश्मीर में प्रति हेक्टेयर 173.41 टन प्रति हेक्टेयर कार्बन स्टॉक है। दूसरे नंबर पर हिमाचल प्रदेश 167.10 टन प्रति हेक्टेयर, सिक्किम 166.24 टन प्रति हेक्टेयर और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 162.86 टन है।

ये आकंडे पिछले दो दशकों के आकलनों के आधार पर निकाले गए हैं। यहां के जंगल के कार्बन स्टॉक में बढ़ोतरी हुई है। 2011 के आकलन में कार्बन स्टॉक 6,663 मिलियन टन से बढ़कर वर्तमान आकलन में 7,204 मिलियन टन हो गया है, जो 2011 से 2021 की अवधि के बीच 541 मिलियन टन की वृद्धि दर्शाता है।