भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने जारी किया अरेस्ट वारंट, संपत्ति जब्त करने का भी आदेश

आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हुआ है। गाजियाबाद की अदालत ने नगीना सांसद को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।

Updated: Oct 02, 2026, 04:17 PM IST

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। गाजियाबाद की MP-MLA कोर्ट ने आजाद समाज पार्टी के मुखिया और नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने उनकी संपत्ति को जब्त करने का भी आदेश दिया है। यह कार्रवाई साहिबाबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज 2018 के एक मारपीट मामले में हुई है। 

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद पर आरोप है कि वह बार-बार समन मिलने के बावजूद कोर्ट की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला साहिबाबाद इलाके में एक शादी समारोह के दौरान एक युवक से मारपीट से जुड़ा है। मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 और 305 के तहत केस दर्ज किया गया था। आरोप है कि चंद्रशेखर आजाद गुरुवार को भी सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश नहीं हुए, जिसके बाद उनके खिलाफ वारंट जारी किया गया।

पीड़ित के वकील भजनलाल गौतम ने बताया कि गाजियाबाद के नूरपुर गांव के रहने वाले उनके मुवक्किल धर्मेंद्र 2018 में साहिबाबाद के वृंदावन गार्डन में एक शादी समारोह में गए थे। चंद्रशेखर आजाद भी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे। आरोप है कि हथियारबंद लोगों को देखकर धर्मेंद्र ने पूछा कि इतने हथियार लेकर क्यों आए हैं।
वकील के मुताबिक, इसके बाद चंद्रशेखर आजाद, उनके साथी गुलजार सिद्दीकी और पंकज जाटव समेत करीब 15 लोगों ने धर्मेंद्र के साथ मारपीट की और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।

उधर, एक अन्य मामले में बुलंदशहर में घर में घुसकर छेड़छाड़ और मारपीट के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट की टिप्पणी के बाद चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया पर यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा। आजाद ने एक्स पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि जब आरोपी को घटनास्थल पर ही पकड़ लिया गया था तो FIR में उसे ‘अज्ञात’ क्यों बताया गया। उन्होंने कहा कि जब यही पुलिस SC-ST एक्ट के मामलों की जांच करती है तो पीड़ितों का क्या हाल होता होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि खराब जांच, सबूत जुटाने में लापरवाही और कमजोर पैरवी का फायदा आरोपियों को मिलता है, जबकि पीड़ित न्याय के लिए भटकते रहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी लापरवाही बाद में उन लोगों को भी मौका देती है जो इन मामलों को ‘झूठा’ बताकर खारिज करते हैं।