भोपाल में दलित-आदिवासी संगठनों का साझा मंथन, भोपाल डिक्लेरेशन-2 की रूपरेखा होगी तैयार
आयोजकों के अनुसार भोपाल डिक्लेरेशन–2 में वर्तमान समय की सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा बहुजन एकजुटता पर ठोस प्रस्ताव एवं संकल्प प्रस्तुत किए जाएंगे।
भोपाल। भोपाल डिक्लेरेशन के 25 वर्ष पूरे होने से पहले देशभर के दलित और आदिवासी संगठनों ने एक बार फिर साझा मंथन की पहल की है। इसी कड़ी में 12 और 13 जनवरी को भोपाल डिक्लेरेशन 2 का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन की अगुवाई बहुजन इंटेलेक्ट द्वारा की जा रही है, जिसमें 500 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और डोमेन एक्सपर्ट्स के शामिल होने की संभावना है। यह कार्यक्रम देशभर के आदिवासी, दलित और बहुजन समाज के लिए सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकार एवं लोकतांत्रिक भागीदारी पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विमर्श होगा।
आयोजन के पहले दिन यानी 12 जनवरी को भोपाल के होटल पलाश में ड्राफ्टिंग सत्र आयोजित किया जाएगा। इस विशेष ड्राफ्टिंग बैठक में 30 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इस सत्र में साल 2002 में हुए भोपाल डिक्लेरेशन की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक का उद्देश्य पुराने डिक्लेरेशन के क्रियान्वयन की स्थिति का आंकलन करना और मौजूदा दौर की सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनज़र नए सुझावों को शामिल करना है। इस प्रक्रिया के बाद ‘भोपाल डिक्लेरेशन-2’ का प्रारूप तैयार किया जाएगा।
इसके अगले दिन यानी 13 जनवरी को समन्वय भवन, भोपाल में ‘भोपाल डिक्लेरेशन-2’ को लेकर सार्वजनिक चर्चा होगी। इस सत्र में देशभर के 500 से अधिक बुद्धिजीवी और डोमेन एक्सपर्ट्स शामिल
होंगे। इस दौरान लोगों से उनके सुझाव और इनपुट लिए जाएंगे। आयोजकों के मुताबिक यह अंतिम घोषणा नहीं होगी, बल्कि एक ओपन कंसल्टेशन प्रक्रिया का हिस्सा है। भोपाल डिक्लेरेशन-2 का फाइनल ड्राफ्ट वर्ष 2027 में जारी किया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। गौरतलब है कि साल 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के प्रयासों से ही ऐतिहासिक भोपाल डिक्लेरेशन का आयोजन हुआ था। उस समय यह दस्तावेज़ दलित अधिकारों, आरक्षण, शिक्षा, भूमि और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर केंद्रित था। इस बार भी दिग्विजय सिंह की मौजूदगी आयोजन को ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व देती है।
आयोजकों के अनुसार, भोपाल डिक्लेरेशन–1 बहुजन आंदोलन के इतिहास में एक मील का पत्थर रहा है, जिसने अनुसूचित जाति–जनजाति समुदायों के अधिकारों, प्रतिनिधित्व और सामाजिक समानता को लेकर एक साझा वैचारिक दिशा तय की थी। उसी वैचारिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भोपाल डिक्लेरेशन–2 में वर्तमान समय की सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा बहुजन एकजुटता पर ठोस प्रस्ताव एवं संकल्प प्रस्तुत किए जाएंगे।
इस कार्यक्रम का आयोजन अनुसूचित जाति-जनजाति के प्रमुख सामाजिक एवं कर्मचारी-आधारित अधिकारी संगठनों तथा सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा है, जिनमें आदिवासी सेवा मंडल, डोमा परिसंघ, राष्ट्रीय गोंडवाना परिषद, लोकतांत्रिक अधिकार मोर्चा अजाक्स बुद्धिस्ट महिला जागृति मंच, अनुसूचित जाति विकास परिषद, अखिल भारतीय कोली समाज, अहिरवार समाज संघ, जांगड़ा समाज सहित अनेक संगठन शामिल हैं। कार्यक्रम का संयोजन बहुजन इंटेलेक्ट ग्रुप द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों ने सभी सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है।
इस दो दिवसीय मंथन में अनुसूचित जनजाति वर्ग से डॉ विक्रांत भूरिया, उमंग सिंगार, हीरालाल अलावा, ओंकार सिंह मरकाम, डॉ. विशाल मैसी, ए. बी. वट्टी, मोहिंदर सिंह कंवर, प्रकाश सिंह ठाकुर, डॉ. खाका, हरिलाल कौल, तेज कुमार टिग्गा, प्रज्ञा फिलिप्स, आनंद श्याम जैसे दिग्ग्ज शामिल होंगे। जबकि अनुसूचित जाति वर्ग से के. राजू, राजेन्द्र पाल गौतम, उदित राज, फूल सिंह बरैया, भंवर मेघवंशी, चंद्रभान प्रसाद, प्रो. रतनलाल, श्याम बाबू, किरण अहिरवार, डी. पी. अहिरवार, जयपाल सिंह, डॉ. (मेजर) मनोज राजे, सुनील बोरसे सहित कई प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां शामिल होंगे। आयोजकों का कहना है कि मौजूदा दौर की चुनौतियों के बीच यह पहल दलित आंदोलन को नई दिशा और साझा एजेंडा देने का प्रयास है।




