क्या आप जानते हैं एक पेड़ का वाजिब मूल्य, एक्सपर्ट्स ने बताया तो चौंक गए लोग

सुप्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ समिति ने कहा है कि सौ साल पुराने हरे-भरे पेड़ का मूल्य एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकता है, पेड़ का मूल्य हर साल क़रीब 74,500 रुपये बढ़ जाता है

Updated: Feb 05, 2021, 06:16 PM IST

क्या आप जानते हैं एक पेड़ का वाजिब मूल्य, एक्सपर्ट्स ने बताया तो चौंक गए लोग
Photo Courtesy: science

दिल्ली। पेड़ों के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है। यही बात उन प्रोजेक्ट्स पर भी लागू होती है, जिनके निर्माण के लिए देशभर में लाखों पेड़ों की बलि दे दी जाती है, कभी जाहिर तौर पर तो कभी चोरी छिपे। लेकिन उन पेड़ों के कटने से पर्यावरण को कितनी हानि हुई इसकी चर्चा कम ही होती है।

अब सुप्रीम कोर्ट की विशेष समिति ने पेड़ों को लेकर एक अहम वैल्यूएशन किया है। जिसमें कहा गया है कि एक पेड़ का मूल्य एक साल में 74,500 रुपए बढ़ जाता है। यानी पेड़ जितना पुराना होगा, उसकी वैल्यू उतनी अधिक होगी। पेड़ों के इस मूल्य में उनसे हर साल मिलने वाले ऑक्सीजन की वैल्यू 45,000 रुपये और जैव-उर्वरकों की वैल्यू 20,000 रुपये बताई गई है। एक्सपर्ट कमेटी ने माना है कि सौ साल से पुराने हरे भरे पेड़ का सही मूल्य एक करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकता है। 

सुप्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ कमेटी ने बताया है कि पेड़ों का पर्यावरणीय मूल्य क्या है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पेड़ पर्यावरण में ऑक्सीजन छोड़ने के साथ ही मिट्टी को माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स देकर उपजाऊ बनाने का काम भी करते हैं। पेड़ों के पत्तों से खाद बनती है। इतना ही नहीं पेड़ जलवायु और मौसम का तालमेल बनाए रखने में भी मददगार साबित होते हैं। कोर्ट की समिति ने पेड़ों की सभी खूबियों को जोड़कर उनकी कीमत तय की है। इस कमेटी में 5 सदस्य थे।

एक्सपर्ट कमेटी ने निर्देश दिया है कि अगर किसी प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों को काटा जाता है तो छोटे पेड़ों के लिए 10, मीडियम पेड़ों के लिए 25 और बड़े पेड़ों के लिए 50 पौधे लगाने चाहिए। वहीं पांच साल बाद पौधारोपण का ऑडिट करना भी अनिवार्य होना चाहिए, ताकि उनकी वृद्धि निगरानी की जा सके।

दरअसल पश्चिम बंगाल में एक रेलवे ओवरब्रिज परियोजना केस की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीते बरस पांच सदस्यीय कमेटी गठित की थी। जिसके बाद पेड़ों का मूल्य तय करने का काम किया गया। पहले किसी प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों का मूल्य उनकी लकड़ी के दाम के आधार पर तय होता था। लेकिन अब पर्यावरण को मिलने वाले लाभ के आधार पर उनका मूल्यांकन करने की सिफारिश की गई है। समिति ने पाया है कि अगर उनके बताए फॉर्मूले के हिसाब से जोड़ा जाए तो कई प्रोजेक्ट्स के लिए काटे गए पेड़ों का मूल्य उस प्रोजेक्ट की लागत से कहीं ज्यादा होगा।