दफ्तर दरबारी: ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के साथ शह-मात और आईएएस का इस्तेमाल

मध्‍यप्रदेश बीजेपी की राजनीति में केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया अपना दबदबा बढ़ाने में जुटे हैं। उनके समर्थक भी अपनी बात मनवाने के लिए प्रेशर पॉलिटिक्‍स का सहारा ले लेते हैं, मगर गुजरे हफ्ते एक बार फिर सिंधिया खेमे को मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह के प्रशासनिक निर्णय के आगे मात मिली है

Updated: Jun 12, 2022, 05:23 PM IST

दफ्तर दरबारी: ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के साथ शह-मात और आईएएस का इस्तेमाल
IAS Preeti Maithil Nayak

मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर सचिव छवि भारद्वाज केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाली ही हैं। वे मसूरी स्थित राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में बतौर उप संचालक जाएंगी। उनके साथ ही उनके पति आईएएस नंद कुमारम् भी मसूरी में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले हैं। सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। जल्‍द ही आदेश भी जारी हो जाएंगे। छवि भारद्वाज की जगह आईएएस प्रीति मैथिल को मुख्‍यमंत्री सचिवालय में अपर सचिव पदस्थ किया गया है। उनके पास कृषि संचालक का दायित्व भी बना रहेगा। हालांकि प्रीति मैथिल को बीज निगम के एमडी पद से हटा दिया गया है। 

ऊपरी तौर पर यह सामान्‍य प्रशासनिक निर्णय माना जाना चाहिए लेकिन पड़ताल करेंगे तो इस प्रशासनिक निर्णय में राजनीतिक दांव-पेंच भी है। निहितार्थ खोजे जा रहे हैं कि छवि भारद्वाज की ज‍गह प्रीति मैथिल का ही चुनाव क्‍यों हुआ? उनकी योग्‍यता के परे इस नियुक्ति में सिंधिया एंगल भी है। मध्य प्रदेश बीज निगम के अध्यक्ष मुन्नालाल गोयल ने पिछले दिनों निगम की एमडी प्रीति मैथिल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्‍होंने कहा था कि बीज निगम में भ्रष्टाचार के कारण बीते 5 सालों में 132 करोड़ की अंशदान पूंजी समाप्त हो चुकी है। गोयल ने मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को की गई शिकायत में कहा था कि निगम की एमडी अधिकांश समय दफ्तर में नहीं रहती हैं जिसके चलते भी अव्यवस्था उत्पन्न होती है। 

मुन्‍ना लाल गोयल केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं। माना जा रहा था कि उनकी इस शिकायत पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक्‍शन लेंगे। सतही तौर पर हुआ भी यही। आईएएस प्रीति मैथिल को निगम के एमडी पद से हटा दिया गया मगर, यह प्रीति मैथिल के लिए सजा नहीं अधिकार सम्‍पन्‍न होने जैसा है। उन्‍हें मुख्‍यमंत्री सचिवालय में पदस्‍थ किया गया है। यानि वे मुख्‍यमंत्री चौहान के प्राथमिकतावाले कार्यों को पूरा करवाने की जिम्‍मा संभालेंगी। 

जो सोच रहे थे कि सिंधिया कैम्‍प की नाराजगी आईएएस प्रीति मैथिल को भारी पड़ेगी वे खुद अचरज में हैं कि मुख्‍यमंत्री ने सिंधिया समर्थकों की शिकायत को नजरअंदाज कर प्रीति मैथिल को ताकतवर ही बनाया है। यानि, प्रशासनिक क्षेत्र में ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को एक बार फिर सीएम शिवराज सिंह चौहान का प्रभुत्‍व स्‍वीकार करना पड़ा है। इससे पहले ग्‍वालियर चंबल क्षेत्र के आईजी की नियुक्ति के समय सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपना निर्णय बदलकर सिंधिया की बात मानी जरूरी थी लेकिन ज्‍यों ही मौका मिला सिंधिया की पसंद वाले अफसर को हटाने में जरा देर नहीं की। 

कभी गोली मारने के आदेश तो कभी गुम पैन के कारण चर्चा में  

सीएम सचिवालय में पदस्‍थ प्रीति मैथिल सीहोर की निवासी हैं और विधानसभा चुनाव के दौरान एक बयान के कारण चर्चा में आई थीं। उस वक्‍त वे रीवा कलेक्टर थीं और स्‍ट्रांग रूम में ईवीएम की सुरक्षा का जायजा लेते हुए कलेक्‍टर प्रीति मैथिल ने सुरक्षाकर्मियों से कहा था कि ईवीएम के पास कोई आए तो गोली मार देना। वायरल हुए वीडियो में वे कहती सुनाई दे रही थीं कि ये चुनाव मेरे लिए मामूली है, इस फिजूल के चक्कर में 25 साल की साख ख़राब नहीं करूंगी। मुझे आगे प्रिंसिपल सेकेट्री, चीफ सेकेट्री बनना है। ये निर्वाचन मेरे लिए कुछ नहीं है।

वे पिछले दिनों फोन टैपिंग जैसे मामले के कारण भी चर्चा में आई थीं। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग की संचालक प्रीति मैथिल का पैन कार्ड गुम हो गया था। उन्होंने मीटिंग हॉल या लॉबी में पैनकार्ड तलाशने के लिए पीए को फोन लगा दिया। पैनकार्ड तो नहीं मिला लेकिन अगले ही दिन उन्‍हें फेसबुक पर पैनकार्ड के विज्ञापन दिखाई दिए। इस पर उन्होंने कमेंट किया कि हमारे फोन कोई सुन रहा है। आईएएस की इस टिप्‍पणी पर सवाल उठे कि एमपी में फोन टैप हो रहे हैं। बात बढ़ी तो प्रीति मैथिल ने साफ किया कि उनका मतलब फोन टैपिंग से नहीं है। आप मोबाइल पर जो भी करते हैं, गूगल सर्च में सब आ जाता है। पैन गुम होने की बातचीत भी उसी तरह गूगल सर्च का नतीजा था। 

... तो मुख्‍यमंत्री की नाराजगी भी अच्‍छी 

ऐसा नहीं है कि सिर्फ बीजेपी के नेताओं द्वारा शिकायत करने के बाद भी अफसर अहम् पद पा रहे हैं, बल्कि मुख्‍यमंत्री की नाराजगी का शिकार हुए अधिकारी भी एक माह से कम समय में ही बेहतर मैदानी पोस्टिंग पाने में कामयाब हो रहे हैं। ताजा मामला सिवनी जिले से जुड़ा है।

मिशन 2023 में आदिवासी वोट बैंक को लुभाने का जतन कर रही बीजेपी और सरकार के लिए यहां 2 आदिवासियों की मॉब लिंचिंग ने परेशानी पैदा कर दी थी। यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘बड़ी कार्रवाई’ करते हुए सिवनी एसपी कुमार प्रतीक को हटा दिया था। उस इलाके की बादलपार थाना चौकी और कुरई थाने के पूरे स्टाफ को भी बदल दिया गया था। 

अंदरखाने की खबर है कि घटना की जांच के लिए बनाए गए बीजेपी के दल ने रिपोर्ट दी थी कि इस मामले से आदिवासी समुदाय में सरकार की छवि खराब हो रही है। इस रिपोर्ट के आधार पर मुख्‍यमंत्री ने 14 मई को एसपी को हटा दिया था। 

मगर कार्रवाई को एक माह भी नहीं हुआ था कि आईपीएस कुमार प्रतीक मैदानी पोस्टिंग पाने में कामयाब हो गए हैं। सजा पाए अधिकारी आईपीएस कुमार प्रतीक को शहडोल जैसे बड़े जिले की कमान दे दी गई है। इसके पहले शाजापुर एसपी रहे पंकज श्रीवास्तव के साथ भी ऐसा ही हुआ था। उन्‍हें मुख्‍यमंत्री की नाराजगी के बाद हटा दिया गया था। लेकिन उन्‍हें शाजापुर से हटाकर गुना भेज दिया गया। तब भी सवाल उठे थे कि यह कैसी सजा हुई जहां बड़े जिले की कमान मिल रही है। यह तो सजा नहीं मजा है। 

प्रशासनिक गलियारों में यह बात भी वायरल हो रही है कि ऐसे अफसरों के लिए मुख्‍यमंत्री की नाराजगी भी अच्‍छी साबित हो रही है। कुछ देर के तनाव के बाद बड़ा तोहफा मिल जाता है। 

पहले एसीपी और फिर कलेक्‍टर के नाम पर वसूली, एमपी में यह हो क्‍या रहा है

लगता है मध्‍यप्रदेश को अपराधमुक्‍त बनाने के सरकार के जतन छोटे पड़ते जा रहे हैं। सड़क पर अपराधों की बात अलग अब साइबर क्राइम के जरिए भी आम जनता के साथ धोखाधड़ी का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। 

मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पदस्‍थ एसीपी सचिन कुमार अतुलकर के नाम पर सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर धन उगाही का मामला सामने आया था। अब मंदसौर में कलेक्‍टर के नाम पर वसूली की जानकारी आई है। शिकार होने वाली भी आम जनता नहीं बल्कि नायब तहसीलदार है। वह तो अच्‍छा हुआ कि जब कलेक्‍टर के नाम पर पैसों की मांग वाला संदेश दो नायब तहसीलदारों को मिला तब वे कलेक्‍टर के साथ मीटिंग में थे। बैठक खत्‍म हुई तब दोनों नायब तहसीलदारों ने झिझकते हुए कलेक्टर गौतम सिंह को व्‍हाट्स एप चैट दिखाई।

व्हाट्सएप चैट में कलेक्टर के नाम से बने अकाउंट से 25 हजार रुपयों की मांग की गई थी। कलेक्टर स्वयं भी संदेश को देखकर चौंक गए। उन्‍होंने  एसपी अनुराग सुजानिया को लिखित में शिकायत कर दी है। बात केवल इतनी ही नहीं है, कुछ अधिकारियों के पास व्हाट्सएप कॉल भी किए गए थे। संभव है कुछ लोगों ने पैसा दे भी दिया हो।

मुद्दा यह है कि क्‍या जिलों में कलेक्‍टर के नाम पर धन उगाही का तंत्र सक्रिय है? यदि नायब तहसीलदार बैठक में नहीं होते और कलेक्‍टर से पूछने की हिम्‍मत नहीं दिखाते तो मामले का खुलासा भी नहीं होता।