दफ्तर दरबारी: डिप्टी सीएम के ओएसडी को एक करोड़ की रिश्वत, खुल रहे राज
MP NEWS: पहले परिवहन विभाग में करोड़ो की रिश्वत और अब आबकारी विभाग में एक करोड़ की रिश्वत का मामला सामने आने से गुड गवर्नेंस के प्रयासों पर पानी फिरता दिख रहा है। इस शिकायत के बाद कई और किस्से फिर चर्चा में आ गए हैं।
जहरीली शराब से मौत और शराब की अवैध बिक्री को लेकर निशाने पर आया आबकारी विभाग एक बार फिर चर्चा में है। इस बार आबकारी मंत्री डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पर आरोप लगा है। इस बार उन पर भोपाल के शराब ठेकों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और एक करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोप हैं। यह मामला तब खुला जब प्रवर्तन निदेशालय ने कथित 930 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में मोहित गोगिया को गिरफ्तार किया।
सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो में दावा किया गया है कि गोगिया ने कई लोगों के साथ धोखाधड़ी की थी और वर्ष 2022-23 में भोपाल आया था। भोपाल में उसकी मुलाकात ओएसडी दीपम रायचुरा से हुई। गोगिया ने अपने कथित बयान में यह भी कहा है कि उसने रायचुरा को दो किस्तों में एक करोड़ रुपये दिए थे। इन आरोपों के बाद 9 अक्टूबर 2026 को दीपम रायचूरा को उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी प्रभार से हटा दिया गया है।
इन आरोपों का दीपम रायचूरा ने गलत बताया है। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के अनुसार, जिस वित्तीय वर्ष 2024-25 का मामला सामने आया, उस समय दीपम रायचूरा भोपाल आबकारी विभाग में पदस्थ थे, उनके ओएसडी नहीं थे। निष्पक्ष जांच के लिए उन्हें वर्तमान प्रभार से हटाया गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सेवानिवृत्त जज से जांच कराने की मांग की है।
मगर बात केवल ताजा शिकायत और जांच की नहीं है। खबरों के अनुसार मई 2024 में एक महिला आबकारी उपनिरीक्षक के नाम से रायचूरा के खिलाफ शिकायत की खबर प्रकाशित हुई थी। शिकायत में गंभीर आरोप थे, लेकिन शिकायतकर्ता की पहचान को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके तीन महीने बाद अगस्त 2024 में दीपम रायचूरा को डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का ओएसडी बना दिया गया। तब कहा गया था कि इस नियुक्त को लेकर सरकार की सहमति नहीं थी लेकिन डिप्टी सीएम की मांग पर आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया गया। सागर में पदस्थ रहने के दौरान भी दीपम रायचूरा के कामकाज को लेकर तत्कालीन मंत्री गोपाल भार्गव ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद भी दीपम रायचूरा को डिप्टी सीएम जगदीशा देवड़ा का ओएसडी बनाया गया।
आबकारी जैसे विभाग में मंत्री के साथ नियुक्ति के पहले अफसर के खिलाफ हुई शिकायतों की जांच होना आवश्यक है। खासकर तब जब सामान्य प्रशासन ने यह आदेश दिया हो कि मंत्रियों के साथ स्टॉफ की नियुक्ति सिफारिश से नहीं उनके रिकार्ड की जांच के बाद होगी। सवाल यह है कि क्या डिप्टी सीएम जगदीश् देवड़ा का ओएसडी बनाने के पहले दीपम रायचूरा के खिलाफ हुई शिकायतों की जांच नहीं की जानी थी?
न सीएम हारे, न पटवारी झुके, कलेक्टर की पोल खोल
आखिरकार, मोहन यादव सरकार की महत्वाकांक्षी 'स्वामित्व योजना' को लेकर चला आर रहा गतिरोध खत्म हो गया। ग्रामीण इलाकों में 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की सरकारी तैयारी के बीच, पटवारियों की बगावत ने पूरे सूबे के राजस्व तंत्र को हिलाकर रख दिया था। 17 सितंबर से जारी इस अवरोध का दूर करने के लिए सरकार ने पहले कलेक्टरों पर सख्ती दिखाई। सीएस अशोक वर्णवाल ने यह कह दिया था कि जो कलेक्टर योजना में पटवारी से काम नहीं करवा पाएंगे उन्हें भोपाल बुला लिया जाएगा।
कलेक्टरी छीन जाने के डर से कलेक्टरों ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए प्रदेश में 48 पटवारियों पर एक्शन ले लिया। दो दर्जन पटवारी बर्खास्त किए गए तो इतने ही निलंबित कर दिए गए। कलेक्टरों की इस कार्रवाई के बाद बात और बिगड़ गई लेकिन सीएम डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद पटवारियों का मुद्दा हल हो गया है। सरकार खुश है। पटवारी भी कि रजिस्ट्री करवाने पर होने वाली कानूनी परेशानी की आशंका का हल निकल आया है। पटवारियों का बर्खास्त और निलंबित करने के कलेक्टरों के आदेश निरस्त हो गए हैं।
स पूरे मामलें में कलेक्टरों की पोल खुल गई और कलेक्टरी जाने का डर सामने आ गया। सीएस अशोक वर्णवाल की वीसी के बाद भोपाल बुलाए जाने के डर से कलेक्टरों ने जिन पटवारियों पर ताबड़तोड़ एक्शन लिया था उनका कुछ नहीं बिगड़ा। वे अपनी एकता के दम पर काम पर लौट आएंगे। जो कलेक्टर धैर्य से चुप बैठे रहे, उनकी बात खाली नहीं गई। उन्होंने जब निलंबन या बर्खास्तगी की कार्रवाई की ही नहीं थी तो वापस लेने का सवाल ही नहीं है।
रामसखा गए तो रामसखेंद्र ने किया
बात इतनी है कि मैहर के एक स्कूल से रामसखा का तबादला हुआ और रामसखेंद्र आए। बात इतनी सी होती तो कोई मामला ही नहीं था लेकिन नाम के साथ सरनेम जुड़ा तो मुद्दा जाति का बन गया। नाम में दोनों के राम है, लेकिन एक वर्मा और एक द्विवेदी। इस भेद के कारण मैहर का एक स्कूल चर्चा में आ गया। खबरें हैं कि मैहर जिले के करही स्थित शासकीय पीएम श्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से प्राचार्य रामसखा वर्मा सेवानिवृत्त हुए। उनके रिटायर होने के बाद रामसखेंद्र द्विवेदी को प्राचार्य का प्रभार मिला।
आरोप है कि पद संभालने के पहले रामसखेंद्र द्विवेदी ने प्राचार्य कक्ष में गंगाजल और गौमूत्र से शुद्धिकरण किया। वीडियो वायरल होते ही भीम आर्मी ने स्कूल के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की। प्रभारी प्राचार्य का कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। सरस्वती पूजा के दौरान जल का छिड़काव किया गया था। हालांकि, तहसीलदार ने जांच का आश्वासन दिया है। मगर, इस पूरे मामले ने सिस्टम में बैठी जातीय सोच को उजागर कर दिया है।
गांव छोड़ कर शहर में नौकरी, विरोध में उठी आवाज
उन्हें गांव में भेजा गया था ताकि उनके कौशल और ज्ञान का लाभ ग्रामीणों और बच्चों को मिले लेकिन रतलाम सहित अनेक जिले ऐसे हैं जहां कर्मचारी गांव में नौकरी करने गए ही नहीं। शहर में ही काम करने की गरज से अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपना अटैचमेंट जिला मुख्यालय पर करवा रखा है। जबकि मध्यप्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति के अनुसार, राज्य में किसी भी सरकारी कर्मचारी या शिक्षक का संलग्नीकरण करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। सरकार ने आदेश जारी कर सभी पुराने संलग्नीकरणों को तुरंत समाप्त करने के निर्देश दिए थे।
इस आदेश को धत्ता बताते हुए कई कर्मचारी अधिकारी 5 वर्ष से अधिक समय से जिला मुख्यालय में जमे हुए हैं। इनके खिलाफ कर्मचारी संगठनों की ओर से आवाज उठी है। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ उज्जैन संभाग के शहर संगठन मंत्री सर्वेश कुमार माथुर ने शिकायत कर बताया है कि कन्या उत्तर माध्यमिक विद्यालय सरवन की प्राचार्य प्रीति जैन को सहायक आयुक्त कार्यालय जनजाति कार्य विभाग रतलाम में अटैच कर रखा है। कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रावटी में पदस्थ गणित के शिक्षक गणतंत्र मेहता को कन्या शिक्षा परिसर रतलाम का प्रभार दिया गया है। पत्र में लिखा गया है कि सुभाषचंद्र आर्य 10 नवंबर 2014 से, देवेंद्र चावण्ड 1 जनवरी 2021, सुदीप कुलकर्णी 12 अगस्त 2021 से ही जिला मुख्यालय पर अटैच हैं। ये कर्मचारी तो अपने गृह नगर में होने का सुख उठा रहे हैं, लेकिन उन गांवों में पढ़ाई और काम प्रभावित हो रहा है, जहां इन्हें पदस्थ किया गया है।




