सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, 157 किमी साइकिल चलाकर इंदौर से पहुंचे झाबुआ

फिटनेस के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए सॉफ्टवेयर इंजीनियर नीतीश सोनी रोजाना चलाते हैं 30-40 किमी साइकिल, 157 किमी का सफर तय कर पहुंचे इंदौर से झाबुआ, जुलाई में अब तक चला चुके हैं 667 किमी साइकिल

Updated: Jul 19, 2021, 12:31 PM IST

सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, 157 किमी साइकिल चलाकर इंदौर से पहुंचे झाबुआ

झाबुआ। इंफोसिस के सॉफ्टवेयर इंजीनियर नीतीश सोनी पर्यावरण के प्रति इतने सजग हैं कि इन्होंने  इंदौर से 157 किमी का सफर साइकिल से पूरा किया और अपने घर झाबुआ पहुंचे। वे रोजाना करीब 30 से 40 किमी तक साइकिल चलाते हैं। साथ ही इस साइकिलिंग का रिकॉर्ड भी रखते हैं। इस महीने वे 667 किमी साइकिल चला चुके हैं। देश की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस के इंजीनियर नीतीश सोनी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए साइकिल चलाने को अपना जुनून बना लिया है। बैंगलूरू में सहकर्मियों से मिली प्ररेणा से इन्होंने 6 साल पहले 2016 में साइकिल को अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बनाया था। जो  कि आज तक जारी है।

 वे मूलत: मध्यप्रदेश के झाबुआ के रहने वाले हैं। हाल ही में वे इंदौर से 157 किमी का सफर तय कर साइकिल से ही झाबुआ पहुंचे। इस यात्रा में उन्हें करीब साढ़े 9 घंटे का समय लगा जो इन्होंने सुबह सात बजे इंदौर से सफर शुरु किया और शाम करीब साढ़े 4 बजे झाबुआ पहुंचे। रास्ते में तेज गर्मी और उमस के बीच भी उन्होंने हौसलों को पस्त नहीं होने दिया। झाबुआ पहुंचने पर उनके पिता योगेंद्र सोनी और मां भारती सोनी ने तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। नीतीश का कहना है कि कोरोना काल और बदलती हुई दिनचर्या में आज हर कोई अपने स्वास्थ्य के प्रति बहुत सचेत हो गया है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए साइकिल चलाने से अच्छा और कुछ नही है।

बिगड़ती लाइफस्टाइल मोटापे के साथ-साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही है। ऐसे में इन समस्याओं से बचाव करने के लिए शरीर में कुछ तरह की एक्टीविटी जरूरी है, ताकि शरीर को स्वस्थ्य रखने में कुछ मदद मिल सके। ऐसे में साइकिलिंग एक बेहतरीन एक्टिविटी साबित हो सकती है। साइकिलिंग करके खुद के शरीर को एक्टिव और फिट बनाना आसान हो सकता है। इससे न केवल दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है बल्कि तनाव भी कम होता है। मांसपेशियां मजबूत होती हैं और मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी घट जाता है।

नीतीश अपनी झाबुआ यात्रा से पहले 3 बार इंदौर से उज्जैन तक का सफर साइकिल से पूरा कर चुके हैं। अब इस बार उन्हें इंदौर से अपने गृह नगर झाबुआ आना था तो उन्होंने ठान लिया कि वे 157 किमी का सफर साइकिल से ही तय करेंगे। नीतीश की मानें तो साइकिल चलाने से दोहरा लाभ होता है। एक तरफ पर्यावरण संरक्षित होता है साथ ही फिटनेस भी बनी रहती है। हर व्यक्ति को साइकिल का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए।