छत्तीसगढ़ में जिंदगी बचाने की जंग, 105 घंटे बाद बोरवेल से बाहर आया मासूम, सुरंग से बाहर आते ही खोली आंखें

राहुल के सकुशल बाहर निकलने पर हर तरफ बिखरी खुशी, सीएम बघेल बोले - रास्ते अगर चट्टानी थे तो हमारे इरादे फौलादी थे, देश का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन हुआ सफल

Updated: Jun 15, 2022, 12:47 AM IST

छत्तीसगढ़ में जिंदगी बचाने की जंग, 105 घंटे बाद बोरवेल से बाहर आया मासूम, सुरंग से बाहर आते ही खोली आंखें

रायपुर। बोरवेल में फंसे राहुल को आखिरकार 105 घण्टे रेस्क्यू के बाद सकुशल बाहर निकाल लिया गया है। ऑपरेशन "राहुल- हम होंगे कामयाब" के साथ राहुल के बचाव के लिए लगभग 65 फीट नीचे गड्ढे में उतरी रेस्क्यू दल ने कड़ी मशक्कत के बाद राहुल को सुरक्षित बाहर निकाला। राहुल जैसे ही सुरंग से बाहर आया। उसने आँखे खोली और एक बार फिर दुनिया को देखा। यह क्षण सबके लिए खुशी का एक बड़ा पल था। पूरा इलाका राहुलमय हो गया।

राहुल को तत्काल एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया जहां उसकी हालत स्थिर है। सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट किया, 'माना कि चुनौती बड़ी थी, हमारी टीम भी कहाँ शांत खड़ी थी। रास्ते अगर चट्टानी थे, तो इरादे हमारे फौलादी थे। सभी की दुआओं और रेस्क्यू टीम के अथक, समर्पित प्रयासों से राहुल साहू को सकुशल बाहर निकाल लिया गया है। वह जल्द से जल्द पूर्ण रूप से स्वस्थ हो, ऐसी हमारी कामना है।'

राहुल को बाहर निकाले जाने के बाद मौके पर मौजूद चिकित्सा दल द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की गई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राहुल को तत्काल ही बेहतर उपचार के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अपोलो अस्पताल बिलासपुर भेज गया। देश के सबसे बड़े रेस्क्यू अभियान को कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला के नेतृत्व में  अंजाम दिया गया। सुरंग बनाने के रास्ते में बार-बार मजबूत चट्टान आ जाने से 4 दिन तक चले इस अभियान को रेस्क्यू दल ने अंजाम देकर मासूम राहुल को एक नई जिंदगी दी है। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जांजगीर में बोरवेल में गिरे बच्चे के लिए बेहद चिंतित रहे। यही वजह है कि वे लगातार रेस्क्यू का अपडेट लेते रहे। उन्होंने राहुल को सकुशल बाहर निकालने के निर्देश दिए थे। उन्होंने वीडियो कॉल कर राहुल के पिता और माता से भी बात की थी। उन्होंने राहुल को बाहर निकालने के लिए हरसंभव मदद का आवश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही राज्य स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सम्पूर्ण घटनाक्रम की निगरानी रखी जा रही थी। 

इन पांच दिनों में राहुल की सतत निगरानी सीसीटीवी कैमरे से की जा रही थी। उसे जूस, केला और अन्य खाद्य सामग्रियां भी दी जा रही थी। विशेष कैमरे से पल-पल की निगरानी रखने के साथ ऑक्सीजन की सप्लाई भी की जा रही थी। उसका हौसला बनाए रखने के लिए लगातार उससे बात की जा रही थी। पांच दिन तक 60 फीट नीचे दबे रहने के कारण और गड्ढे में पानी भरे होने के कारण उसकी हालत खराब है। उसका मूवमेंट कम है, लेकिन वह इशारे कर रहा है।

जब सुरंग में निकला सांप​​​

बोरवेल के गड्ढे के समानांतर सुरंग बनाने के कार्य के दौरान संकट कम नहीं था। बचाव टीम के विशेषज्ञों के बताया कि पथरीली चट्टान होने से साँप-बिच्छू मिलने का खतरा भी रहता है, इसलिए तत्काल प्रशासन को एंटी-वेनम और सर्प विशेषज्ञ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री के कार्यालय से किये गए ट्वीट में बताया गया कि कैमरे से देखा गया कि राहुल को बचाने के लिए बनाई गई सुरंग में सांप भी आ गया था, लेकिन राहुल को वह नुकसान नहीं पंहुचा सका। 

चट्टानों से न हौसला डिगा, न राहुल

बोरवेल में फंसे राहुल को बचाने के लिए रेस्क्यु दल ने हर बार कड़ी चुनातियों का सामना किया। राहुल के रेस्क्यु में बड़े-बड़े चट्टान बाधा बनकर रोड़ा अटकाते रहे। इस बीच रेस्क्यु टीम को हर बार अपना प्लान बदलने के साथ नई-नई चुनौतियों से जूझना पड़ा। मशीनें बदलनी पड़ी। 65 फीट नीचे गहराई में जाकर होरिजेंटल सुरंग तैयार करने और राहुल तक पहुँचने में सिर्फ चट्टानों की वजह से ही 4 दिन लग गए। रेस्क्यु टीम को भारी गर्मी और उमस के बीच झुककर, लेटकर टार्च की रोशनी में भी काम करना पड़ा। इसके बावजूद अभियान न तो खत्म हुआ और न ही जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे राहुल ने हार मानी।