झीरम घाटी जांच आयोग का हुआ पुनर्गठन, दो नए सदस्य शामिल

इस आयोग में न्यायमूर्ति सतीश के अग्निहोत्री को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि बिलासपुर हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जी. मिन्हाजुद्दीन को जांच आयोग का सदस्य बनाया गया है, यह आयोग तीन बिंदुओं पर झीरम घाटी मामले की जांच करेगा, इसके साथ ही आयोग 6 महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा

Updated: Nov 11, 2021, 05:17 PM IST

झीरम घाटी जांच आयोग का हुआ पुनर्गठन,  दो नए सदस्य शामिल

रायपुर। झीरम घाटी हमले की जांच करने के लिए भूपेश बघेल सरकार ने जांच आयोग का पुनर्गठन कर दिया है। बघेल सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। न्यायमूर्ति सतीश के अग्निहोत्री को इस जांच का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जबकि बिलासपुर हाई कोर्ट के पूर्व जज जी. मिन्हाजुद्दीन को जांच आयोग का सदस्य बनाया गया है।

छत्तीसगढ़ के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस बाबत आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेश में इसका उल्लेख किया गया है कि यह आयोग तीन अतिरिक्त बिंदुओं पर पूरे मामले की जांच करेगा। आदेश के मुताबिक पूर्व में जारी अधिसूचना के अतिरिक्त तीन अन्य बिंदुओं को शामिल किया गया है। जिसमें घटना के बाद पीड़ितों को उपलब्ध कराई गई समुचित चिकित्सीय सुविधा, ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोकने के लिए उठाए गए कदम जैसे पहलुओं पर जांच करने हेतु निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं तीसरे बिंदु में इस बात का उल्लेख किया गया है कि इस मामले में अन्य पहलुओं पर जांच करने की आवश्यकता महसूस होने पर खुद आयोग और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकेगा। जांच के दौरान आयोग को किसी संस्था विशेषज्ञ की सहायता लेने की भी पूरी छूट होगी। आयोग को 6 महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है।

इससे पहले झीरम घाटी मामले में एक अन्य जांच आयोग गठित की गई थी। जिसके अध्यक्ष प्रशांत कुमार मिश्र हाल ही में आंध्र प्रदेश न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने हैं। बीते शनिवार को जांच आयोग ने यह रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने के बनिस्बत राज्यपाल को सौंप दी थी। जिसके बाद पूरे मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया था। खुद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांच आयोग के इस रुख को अनुचित करार दिया था। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा था कि अब तक इस मामले की जांच पूरी भी नहीं हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार पर झीरम घाटी मामले के षड्यंत्रकारियों को बचाने का आरोप भी लगाया था। 

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2013 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों से ठीक पहले 25 मई 2013 को कांग्रेस नेताओं की परिवर्तन यात्रा के दौरान बड़ा नक्सली हमला हुआ था। सुकमा से जगदलपुर जाने के दौरान झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला हुआ था। जिसमें कुल 31 लोगों की जान चली गई थी। जान गंवाने वालों में कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल थे। जिसमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार, योगेंद्र शर्मा, अजय भिंसरा समेत कई दिग्गजों की मौत हो गई थी। यह हमला अब तक के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक माना जाता है। झीरम घाटी हमले के बाद 28 मई, 2013 को प्रशांत मिश्र की अगुवाई में जांच आयोग गठित की गई। उस दौरान राज्य में बीजेपी की सरकार थी और रमन सिंह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हुआ करते थे।