LPG पर खाना बनाने से कैंसर का खतरा, हार्ट और किडनी पर गंभीर दुष्प्रभाव: रिपोर्ट

एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक कुकिंग गैस से बेंजिन, टोल्यूनि, एथिलबेनजीन, जाइलीन और हेक्सेन जैसी जहरीली गैस निकलती है, लंबे समय तक चूल्हे पर खाना बनाने से हार्ट और किडनी पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है।

Updated: Sep 20, 2022, 05:40 PM IST

LPG पर खाना बनाने से कैंसर का खतरा, हार्ट और किडनी पर गंभीर दुष्प्रभाव: रिपोर्ट

घरेलु महिलाओं को प्रदूषण से बचाने के लिए देश में उज्ज्वला योजना लाई गई है। इस योजना के तहत पारंपरिक चूल्हों के बदले कुकिंग गैस की इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। हलांकि, एक स्टडी रिपोर्ट में पता चला है कि कुकिंग गैस का शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव हो सकता है। कुकिंग गैस का इस्तेमाल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का कारक हो सकता है। साथ ही हार्ट और किडनी पर भी दुष्प्रभाव हो सकता है। 

कैलिफ़ोर्निया एयर रिसोर्सेज बोर्ड के अकादमिक शोधकर्ताओं ने बताया है कि गैस सिलिन्डर खतरनाक वायु प्रदूषकों को छोड़ सकते हैं। कुकिंग गैस से बेंजिन, टोल्यूनि, एथिलबेनजीन, जाइलीन और हेक्सेन जैसी जहरीली गैस निकलती है। गैस सिलिन्डर के उपयोग से खतरनाक वायु प्रदूषण होता है। रिपोर्ट के मुताबिक एक सामान्य व्यक्ति हाइवे पर वाहनों के धुंए से जितना वायु प्रदूषण का शिकार होता है, उससे अधिक वह कुकिंग गैस के कारण वायु प्रदूषण का शिकार होता है। 

घरों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का एक्सपोजर अस्थमा का कारण बन सकता है। यह गैस दमा के वयस्कों को भी प्रभावित कर सकती है। यह क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के विकास और तीव्रता दोनों में योगदान करती है। हालांकि, डॉक्टरों के मुताबिक विदेशो में नेचुरल गैस का प्रयोग होता वहीं भारत में LPG का प्रयोग होता है जिसमें प्रोपेन नाम की गैस का प्रयोग होता है। इस गैस के जलने से खतरनाक बेंजीन गैस निकलती तो है लेकिन उसकी मात्रा नेचुरल गैस से निकलने वाली बेंजीन के मुकाबले काफी कम रहती है। 

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अमेरिका में किये गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन घरों में गैस का चूल्हा था, वहां के बच्चों में दमा का दर 42% अधिक था। ऑस्ट्रेलिया में किये गए दूसरे अध्ययन के अनुसार जितने बच्चों को दमा होता है, उनमें से 12.3% का कारण गैस के चूल्हे से निकालने वाला प्रदूषण है। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के लम्बे समय तक एक्सपोज़र के कारन ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, ह्रदय की समस्या, डायबिटीज और कैंसर भी हो सकता है। 

कार्बन मोनोऑक्साइड के कम प्रभाव से सरदर्द और उल्टी हो सकती है, जबकि इसके ज्यादा प्रभाव से अनियमित ह्रदय धड़कन, ह्रदयगति रुकना और असामयिक मौत भी संभव है। कुकिंग गैस से सबसे ज्यादा निकलने वाली गैस कार्बन डाइऑक्साइड एक प्रमुख ग्रीन हाउस गैस है जो पर्यावरण के लिहाज से बहुत खतरनाक मानी जाती है। 

स्टडी रिपोर्ट के अनुसार बिजली के चूल्हे से इस प्रदूषण को कम किया जा सकता है। यदि आप गैस के चूल्हे पर ही खाना पकाना चाहते हैं तो जहां तक संभव हो रसोई को हवादार बनाइये।  खाना बनाते समय खिड़की दरवाजे खुली रखें जिससे किचन में धुंआ भरने की जगह बाहर निकल पाए और हो सके तो चिमनी या फिर एग्जॉस्ट फैन का किचन में प्रयोग करें ताकि किचन में होने वाला सारा प्रदूषण जल्दी से बाहर जा सके। खाना बनाते समय सबसे ज्यादा जरूरी है कि किचन में वेंटिलेशन की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।