Ecofriendly diwali: महिलाओं बनाए ईको फ्रेंडली दीपक, गोबर से बने दियों से रोशन होगी दिवाली

स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने तैयारी, भोपाल की महिलाओं ने बनाए गोबर से दीपक, इकोफ्रेंडली दीपों से रोशन होगा घर आंगन

Updated: Oct 30, 2020, 04:00 PM IST

Ecofriendly diwali: महिलाओं बनाए ईको फ्रेंडली दीपक, गोबर से बने दियों से रोशन होगी दिवाली
Photo courtesy: news 18

भोपाल। दिवाली में इस बार इको फ्रेंडली दिए भी इस्तेमाल किए जाएंगे। भोपाल के अहीर मोहल्ला इलाके की महिलाओं ने गोबर से हजारों दिए तैयार किए हैं। महिलाओं ने गोबर से बने इन ईको फ्रेंडली दीपकों की कीमत बाजार से काफी कम रखी है, ताकि लोग आसानी से खरीद सकें।

भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव की वजह से चीनी आइटम्स को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है। ऐसे में स्वदेशी सामान को बढ़ावा देने के लिए महिलाएं गाय के गोबर से दीपकों का निर्माण कर रही हैं। महिलाओं ने दीपावली में उपयोग होने वाली माता लक्ष्मी-गणेश-सरस्वती माता की मूर्तियां, शुभ-लाभ, समेत डिजाइनर दिए तैयार कर रही हैं।

इन ईकोफ्रेंडली दीपकों को तैयार करने का जिम्मा उठाया है भोपाल के बरखेड़ी स्थित अहीर मोहल्ला की महिलाओं ने। काशी दीप गौ उत्पादन केंद्र ने महिलाओं को दिए बनाने का काम सौंपा है। दीपक बनाने में जुटी कांता यादव का कहना है कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और लोगों को स्वदेशी का महत्व समझाने के लिए उन्होंने यह काम शुरू किया है। कांता के साथ इस काम में उनके मोहल्ले की अन्य महिलाएं भी शामिल हैं।

 ईकोफ्रेंडली दीपक बनाने में लगी महिलाओं ने इसकी तैयारी काफी दिनों पहले से ही शुरू कर दी थी। लॉकडाउन के दौरान उन्होने गोबर से कई आइटम्स बनाना सीखा। इनमें गोबर से धूप और दीपक बनाने का काम उन्हें प्रेरणा दायक लगा। कांता यादव का कहना है कि उन्होंने गोबर से ईकोफ्रेंडली आइटम बनाने के लिए अपने पड़ोस की महिलाओं का समूह बनाया और अब तक सैकड़ों दीपक बना चुकी हैं।

काशी दीप गौ उत्पादन केंद्र से जुड़ी महिलाएं स्वदेशी को बढ़ावा देने में जुटी हैं। उनका कहना है कि दीपक बनाने के लिए सबसे पहले गोबर को सुखाकर उसका पाउडर तैयार करती हैं। फिर गोबर के पाउडर को बारीक छन्नी से छानकर उसमें लकड़ी का बुरादा और ग्वारगम मिलाया जाता है। फिर उसे गूंथ कर दीपक का आकार तैयार किया जाता है। ईकोफ्रेंडली दीपकों को धूप में सुखाया जाता है। इन महिलों का कहना है कि वे इन्हे नो प्रॉफिट-नो लॉस याने लागत मूल्य पर बेचेंगी। ताकी ज्यादा से ज्यादा लोग इस दीवाली पर ईकोफ्रेंडली दीपकों से अपना घर रोशन कर सकें।