देव उठनी एकादशी आज, योग निद्रा से जागे श्री हरि विष्णु

देव उठनी एकादशी पर बन रहे तीन शुभ संयोग, सिद्धि, महालक्ष्मी और रवि योग देंगे शुभफल, शालीग्राम-तुलसी का विवाह आज, मांगलिक कार्यों की हो रही शुरुआत

Updated: Nov 26, 2020, 12:34 AM IST

देव उठनी एकादशी आज, योग निद्रा से जागे श्री हरि विष्णु
Photo Courtesy: Aaj Tak

देवउठनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी और देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान विष्णु और तुलसी का पूजन करने का विधान है। देवउठनी एकादशी को सभी एकादशियों में उत्तम और फलदायी माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीहरि आज के दिन योगनिद्रा से जागते हैं। इस दिन व्रत, पूजन करने का विधान है। एकादशी पर तुलसी पूजन किया जाता है। देवउठनी ग्यारस पर भगवान विष्णु और माता तुलसी का विवाह होता है।

तुलसी-शालीग्राम विवाह देगा शुभफल

देव प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी-शालीग्राम का विवाह विधि विधान से करना चाहिए। आंगन में गन्ने का मंड़प सजा लें। रंगोली बनाकर तुलसी का पौधा रखें, उसमें भगवान विष्णु की प्रतिमा या शालीग्राम स्थापित करें। तुलसी पूजन में लाल फूल, लाल वस्त्र का प्रयोग करें। घी का दीपक जलाएं, घर के आंगन में भगवान विष्णु के चरणों की आकृति भी बनाएं। पूजा के समय माता तुलसी को सुहाग की चूड़ी, बिन्दी, सिंदूर, लाल चुनरी जरूर चढ़ाना चाहिए। शालिग्राम का हल्दी-चंदन से तिलक करना चाहिए। पूजा के बाद 11 बार तुलसी की परिक्रमा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। पूजा की थाली में फल, मिठाई, बेर, सिंघाड़ा और गन्ना, आंवला सजाकर भगवान को भोग लगाएं। 

देवप्रबोधनी एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति प्रदान करता है। मनोकामना पूरी होती है। तुलसी-शालिग्राम विवाह के विधि विधान से करने से सुख और समृद्धि मिलती है। देव उठनी एकादशी पर तुलसी विवाह से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन सूर्यास्त से पहले तुलसी का पौधा बांटने से पुण्य मिलता है। इस दिन माता तुलसी को श्रंगार की सामग्री, लाल चुनरी चढ़ाने से सौभाग्य की प्राप्ती होती है। एकादशी पर घरों को दीपों से सजाया जाता है।

देवउठनी एकादशी पर बने तीन शुभ संयोग

इस साल देवउठनी एकादशी पर तीन शुभ संयोग बन रहे हैं। सिद्धि, महालक्ष्मी और रवियोग बनने से एकादशी शुभफल देने वाली बन गई है। ये तीनो शुभ संयोग अक्षय फल प्रदान करने वाले हैं। एकादशी तिथि बुधवार को सूर्योदय से आरंभ होकर गुरुवार के दिन सूर्योदय तक रहेगी। कई सालों बाद एकादशी पर ऐसा संयोग बना है। देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो रही है।

गन्ना और सूप का है विशेष महत्व

देव प्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु को गन्ना अर्पित किया जाता है। इस दिन से किसान गन्ने की फसल की कटाई शुरू करते हैं। भगवान विष्णु को अर्पित करने के बाद गन्ने को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। एकादशी पर भगवान विष्णु योग निंद्रा से जागते हैं। महिलाएं घर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के आने की कामना करती हैं। कुछ स्थानों पर सूप पीटने की परंपरा है, माना जाता है कि ऐसा करने से दरिद्रता भगाती है, समृद्धि आती है।