स्वयंभू विश्वगुरु बेनकाब, सिमट गया 56 इंच का सीना, US-ईरान जंग में पाक की मध्यस्थता पर घिरी मोदी सरकार
कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार विश्व मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने और आतंकवाद के प्रति उसके समर्थन को उजागर करने में नाकाम रही।
अमेरिका और ईरान के बीच विगत 40 दिनों से जारी जंग 2 हफ्तों के लिए रोक दी गई है। दोनों देशों के बीच आखिरकार सीजफायर पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। US- ईरान जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका को लेकर भारत की मोदी सरकार की आलोचना हो रही है।
देश की मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्धविराम में पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि यह सरकार की विदेश नीति के लिए गंभीर झटका है तथा "स्वयंभू विश्वगुरु" बेनकाब हो गए हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि मोदी सरकार विश्व मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने और आतंकवाद के प्रति उसके समर्थन को उजागर करने में नाकाम रही।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, 'पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल तथा ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का पूरी दुनिया सावधानीपूर्वक स्वागत करेगी। यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान में शासन के शीर्षस्थ अधिकारियों की लक्षित हत्याओं के साथ शुरू हुआ था। यह प्रधानमंत्री मोदी की अपनी बहुप्रचारित इज़राइल यात्रा पूरी करने के ठीक दो दिन बाद शुरू हुआ था, एक ऐसी यात्रा जिसने भारत के वैश्विक कद और प्रतिष्ठा को कम कर दिया था।'
जयराम रमेश के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा में इजराइल के नरसंहार और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में उसकी आक्रामक विस्तारवादी नीतियों के बारे में कुछ नहीं कहा था। रमेश ने कहा कि युद्धविराम में पाकिस्तान द्वारा निभाई गई भूमिका प्रधानमंत्री मोदी की अत्यधिक व्यक्तिगत स्तर वाली कूटनीति के सार और शैली दोनों के लिए एक गंभीर झटका है। उनका कहना है कि मोदी सरकार की यह विदेश नीति जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को अलग-थलग करने और दुनिया को यह विश्वास दिलाने में सफल नहीं हुई कि पाकिस्तान स्पष्ट रूप विफल राष्ट्र है।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि वर्ष 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान को अलग- थलग करने में सफलता हासिल की थी। रमेश ने कहा, 'पूरी तरह से बाहरी दानदाताओं की उदारता पर निर्भर, एक दिवालिया अर्थव्यवस्था वाला और कई मायनों में टूटा हुआ देश पाकिस्तान ऐसी भूमिका निभाने में सक्षम हुआ, जो प्रधानमंत्री मोदी की सहभागिता और विमर्श प्रबंधन की रणनीति पर सवाल उठाता है। उन्होंने या उनकी टीम ने यह भी कभी नहीं बताया कि 10 मई, 2025 को ऑपरेशन सिन्दूर को अचानक क्यों रोक दिया गया था - जिसकी पहली घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री की ओर से हुई थी और जिसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति तब से लगभग सौ बार श्रेय ले चुके हैं।'




