USA : चीनी कम्‍युनिस्‍ट अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध

अमेरिका ने इन अधिकारियों पर हांगकांग की स्वायत्तता, मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता को कमतर करने लगाया है

Publish: Jun-27, 2020, 08:30 PM IST

USA :  चीनी कम्‍युनिस्‍ट अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध
Pic: Swaraj Express

भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिका ने 26 जून को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। अमेरिका ने इन अधिकारियों पर हांगकांग की स्वायत्तता, मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता को कमतर करने लगाया है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने इस कदम की घोषणा करते हुए कहा कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश को लागू कर रहे हैं। इससे पहले चीन द्वारा हांगकांग के लिए विवादास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पास करने पर ट्रंप ने कहा था कि वे चीन पर कार्रवाई करेंगे।

Click: चीन का बहिष्कार करने से भारतीय उद्योगों को नुकसान का डर

पोम्पिओ ने कहा, ‘’ आज मैं सीसीपी के मौजूदा और पूर्व अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंधों की घोषणा करता हूं। इनके बारे में माना गया है कि इन्होंने 1984 चीन-ब्रिटेन संयुक्त घोषणा पत्र में गारंटी प्रदान की गई हांगकांग की उच्च स्तर की स्वायत्तता को दबाया या मानवाधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रता को कमतर किया या ऐसा करने में इनकी मिलीभगत है। ‘’

उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों के परिवार के सदस्य भी इसी तरह के प्रतिबंध का सामना कर सकते हैं।

असल में चीन द्वारा हांगकांग के लिए पारित किया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून चीनी सुरक्षा एजेंसियों को हांगकांग में काम करने के साथ-साथ हांगकांग के आरोपियों को चीन प्रत्यर्पित करने की अनुमति देता है। चीन इस कानून को क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए जरूरी बताता है। वहीं आलोचक इस कानून को हांगकांग की अर्धस्वायत्तता और हमला और ‘एक देश, दो व्यवस्था’ के खिलाफ बताते हैं। अमेरिका इस कानून को लेकर लगातार मुखर रहा है, वहीं चीन का कहना है कि यह उसका आंतरिक मामला है।

वहीं कई विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ट्रंप प्रशासन चीन को लेकर इस तरह के कदम इसलिए उठा रहा है क्योंकि ट्रंप चीन विरोधी भावना के साथ राष्ट्रपति चुनाव लड़ना चाहते हैं। वे पहले ही कोरोना वायरस को चीन की साजिश बताते आ रहे हैं। 

इसस पहले अमेरिका के विदेश मंत्री ने कहा था कि चीन की वजह से भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया इत्यादि देशों को खतरा बढ़ रहा और इस संदर्भ में अमेरिका अपने सैनिकों की तैनाती की समीक्षा कर रहा है।