माखनलाल पत्रकारिता विवि में ABVP की गुंडागर्दी, छात्राओं के साथ सरेआम हुई छेड़छाड़ और मारपीट

राजधानी भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सुरक्षित नहीं हैं बेटियां, एबीवीपी के सदस्यों ने छात्राओं के साथ की छेड़छाड़ और मारपीट

Updated: Nov 08, 2022, 09:05 AM IST

माखनलाल पत्रकारिता विवि में ABVP की गुंडागर्दी, छात्राओं के साथ सरेआम हुई छेड़छाड़ और मारपीट

भोपाल। मध्य प्रदेश का एकमात्र पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी एक बार फिर विवादों में है। विवि परिसर में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और मारपीट का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि आरएसएस की छात्र इकाई एबीवीपी से जुड़े लोगों ने छात्राओं के साथ बदसलूकी की। एनएसयूआई ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित छात्रा के साथ एबीवीपी से जुड़े एक छात्र ने सोमवार को छेड़खानी की घटना को अंजाम दिया। छात्रा ने जब इसका विरोध किया तो वह मारपीट पर उतारू हो गया। बीच बचाव में कुछ और छात्र आए तो एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने उनके साथ भी मारपीट की। इस दौरान छात्राएं रोती रहीं, लेकिन कोई उन्हें बचाने नहीं आया। 

हैरानी की बात ये है कि जब एबीवीपी के सदस्य गुंडागर्दी कर रहे थे तब विवि के तमाम पदाधिकारी भी परिसर में ही मौजूद थे। लेकिन छात्राओं को बचाने के बजाए वे ऊपर से नजारा देखते रहे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। छात्र संगठन एनएसयूआई ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है। 

एनएसयूआई नेता रवि परमार ने आरोप लगाया है कि आरोपी छात्रों को कुलपति केजी सुरेश के समर्थन प्राप्त है। परमार ने बुधवार को विवि परिसर में आंदोलन का ऐलान किया है। बहरहाल छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 के तहत मुकदमा कायम किया है। वहीं मामले पर बवाल बढ़ने के बाद विवि ने कार्रवाई के नाम पर चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

विवि परिसर द्वारा जारी आदेश के मुताबिक जांच कमेटी में डॉ श्रीकांत सिंह, पवित्र श्रीवास्तव, मनीष माहेश्वरी और आरती सारंग को शामिल किया गया है। उक्त समिति को 11 नवंबर तक अपनी अनुशंसा प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। 

एनएसयूआई ने इस जांच कमेटी पर भी सवाल उठाए हैं। छात्र संगठन का कहना है कि, 'जांच कमेटी में मंत्री विश्वास सारंग की बहन आरती सारंग को शामिल किया गया है। यह कमेटी निष्पक्ष नहीं है। सत्ताधारी दल के दबाव में आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। छेड़छाड़ को आपसी मारपीट बताया जा रहा है। हम इस जांच कमेटी को भंग कर निष्पक्ष कमेटी गठित करने की मांग करते हैं।'