किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ लक्ष्मण सिंह की पदयात्रा, जयवर्धन बोले, ये सूरत बदलनी चाहिए

चाचौड़ा से कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने किया एकदिवसीय किसान सम्मान पदयात्रा, समापन कार्यक्रम में शामिल हुए हजारों किसान, राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह बोले- पीड़ितों के लिए लड़ते रहेंगे

Updated: Sep 04, 2021, 07:11 PM IST

किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ लक्ष्मण सिंह की पदयात्रा, जयवर्धन बोले, ये सूरत बदलनी चाहिए
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मधुसूदनगढ़। मध्य प्रदेश में राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। शनिवार को चाचौड़ा से कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने किसानों की मांगों को लेकर एकदिवसीय पदयात्रा निकाला। इस किसान संघर्ष यात्रा में उनके भतीजे व राघौगढ़ से कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह भी शामिल हुए। पदयात्रा के समापन के दौरान जयवर्धन सिंह ने कहा कि पीड़ितों के लिए हम संघर्ष करते रहेंगे।

लक्ष्मण सिंह ने शनिवार को ढोका मंदिर उकावद पर श्री बालाजी का दर्शन कर किसान संघर्ष पदयात्रा शुरू किया। करीब 15 किलोमीटर पैदल मार्च के बाद देर शाम यह यात्रा मधुसूदनगढ़ में समाप्त हुआ। लक्ष्मण सिंह ने यह पदयात्रा विवादास्पद केंद्रीय कृषि कानूनों, शिवराज सरकार की नीतियों और किसानों को फसल की मुआवजे देने की मांग को लेकर किया था। सिंह ने बताया कि किसानों के लिए संघर्ष के अगले पड़ाव में मधुसूदनगढ़ से भोपाल तक सायकिल यात्रा करेंगे। 

पदयात्रा के समापन के दौरान मधुसूदनगढ़ में हजारों की संख्या में किसान मौजूद थे। यहां लोगों को संबोधित करते हुए राघौगढ़ विधायक जयवर्द्धन सिंह ने कहा कि, 'जो गरीब जनता है, जो पीड़ित वर्ग है, जो किसान हैं हम उनकी आवाज उठाएंगे। इस दौरान मौजूद महिलाओं से उन्होंने वादा किया कि जिस तरह पिछली बार कांग्रेस सरकार आने के बाद उनकी पेंशन की रकम बढ़ाई गई थी, इसी तरह यदि वे दुबारा सत्ता में लौटते हैं तो पेंशन की रकम को बढ़ाकर 1000 रुपए प्रतिमाह किया जाएगा। इस पदयात्रा में ब्यावरा से कांग्रेस विधायक रामचंद्र दांगी और पूर्व विधायक पुरुषोत्तम दांगी शामिल हुए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं: जयवर्धन

किसान संघर्ष पदयात्रा की तस्वीरें साझा करते हुए विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा है कि सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं है। दरअसल, उन्होंने दुष्यंत कुमार की पंक्तियों को ट्वीट किया है। कांग्रेस नेता ने लिखा, 'हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेंरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।'