मध्य प्रदेश सरकार ने दी नदियों में मशीनों से रेत खनन की इजाज़त

ठेकेदारों को मशीनों से रेत खनन की इजाज़त दिए जाने का राज्य की नदियों पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, नर्मदा नदी को इस इजाज़त से फिलहाल अलग रखा गया है

Updated: Jan 12, 2021, 12:22 AM IST

मध्य प्रदेश सरकार ने दी नदियों में मशीनों से रेत खनन की इजाज़त
Photo Courtesy: twitter

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने ठेकेदारों को नदियों में मशीनों से रेत खनन की छूट दे दी है, जिसे नदियों की सेहत के लिए बहुत नुक़सानदेह माना जा रहा है। मशीनों से रेतत खनन की इजाजत देने का काम स्थानीय प्रशासन करेगा। फिलहाल नर्मदा नदी को इस छूट से अलग रखने का फैसला लिया गया है।

खनिज विभाग ने इस बारे में सभी जिला कलेक्टरों को आदेश जारी कर दिए हैं। कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा गया है कि मशीनों से रेत खनन की इजाजत देते वक्त रेत खनन, परिवहन, भंडारण और व्यापार नियम 2019 के दो नियमों का पालन करना आवश्यक होगा।

नर्मदा नदी की स्वीकृत रेत खदानों से मशीनों से रेत खनन, लदान और भंडारण पर पूर्णत: रोक रहेगी। वहीं दूसरी नदियों में 5 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली खदानों में रेत खनन के काम में लोकल मजदूरों को प्राथमिकता देनी होगी। प्रदेश की अन्य नदियों में मशीनों से खनन अनुमति खनन योजना और पर्यावरण स्वीकृति के बाद दी जाएगी। इस दौरान सस्टेनेबल सैंड माइनिंग मैनेजमेंट गाइडलाइन का पालन भी अनिवार्य होगा, प्रतिबंधित क्षेत्रों में रेत खनन पर रोक पहले की तरह जारी रहेगी।

किसी भी जल प्रदाय योजना के 200 मीटर एरिया, किसी पुल के 200 मीटर तक के क्षेत्र के भीतर, नेशनल हाइवे और रेल लाइन के 100 मीटर के एरिया में, किसी नहर, तालाब, या जलाशय या बिल्डिंग से 50 मीटर, स्टेट हाइवे के 50 मीटर क्षेत्र, जल प्रदाय योजना या जल संसाधन योजना के 200 मीटर, अपस्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम क्षेत्रों में खनन पर रोक रहेगी। वहीं स्टेट हाइवे के 50 मीटर, ग्रामीण सड़कों के किनारे 10 मीटर के भीतर, किसी भी धार्मिक, सांस्कृतिक या ऐतिहासिक स्थल के 200 मीटर के क्षेत्र में खनन पर रोक रहेगी।

इन आठ स्थानों पर जिला कलेक्टर ने पर्यावरणीय समेत कई अन्य कारणों से खनन पर रोक लगाई हुई है। लेकिन इसमें एक प्रावधान रखा गया है कि अगर कोई ठेकेदार वहां खनन की परमीशन चाहता है तो उसे विभाग की एनओसी लाना अनिवार्य होगा। 

गौरतलब है कि सरकार ने करीब छ महीने पहले कहा था कि प्रदेश में रेत खदानों में अब मशीनों की जगह मजदूरों से काम कराया जाएगा। लोडिंग का काम भी मजदूरों से करवाने की बात कही गई थी। लॉकडाउन के दौरान मशीनों और डंपरों का उपयोग करने पर मालिकों के खिलाफ एफआईआर की बात कही  गई थी। लेकिन अब सरकार ने यूटर्न लेते हुए अपने ही फैसले को उलट दिया है। दरअसल, प्रदेश सरकार के तमाम दावों के बावजूद मशीनों से रेत खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा था। अक्सर इसकी शिकायतें प्रदेश के कई जिलों से आती रही हैं। लेकिन अब सरकार ने अपने उस निर्णय को बदलकर ऐसा फैसला किया है, जो नदियों और पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।