पन्ना में रेत माफिया ने हड़पी दलितों की ज़मीन, दिग्विजय सिंह ने लोकायुक्त से की कार्रवाई की मांग

दिग्विजय सिंह ने पन्ना में सक्रिय रेत माफिया पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर लोकायुक्त से मुलाकात की, साथ ही उन्होंने एक ज्ञापन भी लोकायुक्त को सौंपा, कांग्रेस नेता ने क्षेत्र में दलितों की ज़मीन हड़पने वाले रेत माफिया का भी ज़िक्र किया, उन्होंने बताया कि रेत माफिया के तार उत्तर प्रदेश और हरियाणा से भी जुड़े हुए हैं

Updated: Oct 26, 2021, 06:24 PM IST

पन्ना में रेत माफिया ने हड़पी दलितों की ज़मीन, दिग्विजय सिंह ने लोकायुक्त से की कार्रवाई की मांग

भोपाल। पन्ना में सक्रिया रेत माफिया पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को भोपाल लोकायुक्त जस्टिस एन के गुप्ता से मुलाकात की। कांग्रेस नेता ने लोकायुक्त को इस सिलसिले में एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें उन्होंने जस्टिस गुप्ता को बताया कि पन्ना ज़िले के गांवों में रेत माफिया ने पिछड़ा वर्ग के कई किसानों की ज़मीन हड़प ली है। जो कि पीड़ित किसानों की भूमि से करोड़ों रुपए की रेत निकाल कर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बेच रहे हैं। कांग्रेस नेता ने लोकायुक्त से रेत माफियाओं के खिलाफ माइनिंग एक्ट में कार्रवाई करने की मांग की है। 

कांग्रेस नेता ने अपनी शिकायत में पन्ना ज़िले की अजयगढ़ पंचायत के अध्यक्ष भरत मिलन पाण्डेय के साथ हुई मुलाकात का ज़िक्र करते हुए बताया कि इस रेत खनन घोटाले में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के रेत माफिया शामिल हैं। जो कि पन्ना ज़िले की अमानगंज तहसील से रोज़ाना एक हज़ार डंपर रेत निकालकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कस्बों में बिना रोयल्टी के बेच रहे हैं। 

प्रशासन और खनिज विभाग की मिलिभगत से हो रहा है रेत घोटाला 

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने लोकायुक्त से की अपनी शिकायत में यह आरोप लगाया है कि यह पूरा घोटाला शिवराज सरकार में खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह के विभाग और स्थानीय प्रशासन की मिलिभगत से हो रहा है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन और खनिज अधिकारी सभी मिलकर भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा जी और खनिज मंत्री के संरक्षण में अवैध खनन को बढ़ावा दे रहे हैं।कांग्रेस नेता ने लोकायुक्त को शिकायत में बताया कि यह आश्चर्य की बात है कि खुद खनिज मंत्री के क्षेत्र में करोड़ों रुपए की रेत का अवैध कारोबार धड्डले से चल रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब बड़े बड़े नेताओं के इशारे पर हो रहा है।

राज्यसभा सांसद ने रेत घोटाले का अंजाम दे रहे पूर्व ठेकेदार रसमीत सिंह मल्होत्रा का भी ज़िक्र किया है। कांग्रेस नेता ने बताया है कि मल्होत्रा ने इकरार नामे के ज़रिए अजयगढ़ तहसील के रामनई, बरौनी, बल्दूपुरा, जिगनी, चंदौरा, बरकौला, भानपुर, मोहना और बीरा गांवों के रेतिले खेतों को हथिया लिया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि चंद हज़ार रुपए देने के एवज़ में दलित किसानों की ज़मीन हड़प ली गई है। यहां प्रतिबंधित मशीनों से सैकड़ों ट्रक रेत निकाली जा रही है। 

रेत घोटाला करने वाले का कच्चा चिट्ठा 
किसानों की ज़मीन हड़पने वाले रसमीत सिंह मल्होत्रा का कच्च चिट्ठा खोलते हुए कांग्रेस नेता ने लोकायुक्त को बताया कि यह व्यक्ति मध्य प्रदेश के होशंगाबाद ज़िले के पिपरिया का रहने वाला है। मल्होत्रा के परिवार ने होशंगाबाद से पन्ना जा कर पिछड़ा वर्ग के छोटे और सीमांत किसानों से एग्रीमेंट कर लिया। इसी इकरारनामे के कारण आज हज़ारों डंपर रेत बिना किसी रोयल्टी के बेची जा रही है, जिससे शासन को भी करोड़ों का नुकसान हो रहा है।

मल्होत्रा पर हरियाणा में भी दर्ज है मुकदमा
कांग्रेस नेता ने कहा कि जिस रेत माफिया रसमीत सिंह मल्होत्रा द्वारा यह कारोबार चलाया जा रहा है, उस पर पूर्व में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के कलेक्टर ने 17 करोड़ रू. की रिकवरी का पत्र होशंगाबाद कलेक्टर को भेजा था, रसमीत सिंह हरियाणा में भी रेत खनन का काम कर रहा था। हरियाणा के उप मुख्यमंत्री चौटाला के रिश्तेदारों ने भी धोखाधड़ी की एक एफ.आई.आर. दर्ज करा रखी है।

रेत घोटाले ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को किया बेनकाब
दिग्विजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित किसानों की बात रखते हुए कहा कि यह घोटाला तीन कृषि कानूनों की याद दिला रहा है, जिस वापस करने की मांग को लेकर एक साल से देश के किसान आंदोलन कर रहे हैं। तीन कानूनों में एक कानून कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग है, जिसका दुष्परिणाम यह है कि किसानों की ज़मीन का बड़ी-बड़ी कंपनियों उपयोग करेंगी और किसान अपनी ही ज़मीन पर मज़दूर बन कर रह जाएगा। कांग्रेस नता ने कहा कि इस घोटाले ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को भी बेनकाब कर के रख दिया है।  

कांग्रेस नेता ने कहा कि इन रेत माफियाओं ने सरकारी ज़मीनों को भी नहीं छोड़ा है, जो कि इस बात का सबूत हैं कि राजस्व विभाग का माफिया तंत्र भी इस घोटाले में संलिप्त है। इसलिए जल्द से जल्द शोषित किसानों की भूमि को माफिया के कब्ज़े से छुड़ाया जाना चाहिए। माफियाओं के साथ-साथ उनके इस कारनामें में शामिल सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।