Digvijaya Singh: लोकतंत्र के उद्देश्य को किया जा रहा है नष्ट

Independence Day 2020: राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिस तरह मंडी में पशुओं की बोली लगाई जाती है वैसे ही लगाई जा रही है विधायकों की बोली

Publish: Aug 15, 2020 06:20 PM IST

Digvijaya Singh:  लोकतंत्र के उद्देश्य को किया जा रहा है नष्ट

भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने देश 74 वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजधानी भोपाल स्थित शासकीय आवास पर झंडा फहराया। इस अवसर पर उनके सुरक्षा में तैनात जवानों ने तिरंगे को सलामी दी। सिंह ने समस्त देशवासियों को 74 वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मीडिया से बात करते हुए राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने कहा है कि हमें जिस उद्देश्य के साथ संविधान के जरिए प्रजातंत्र मिला था आज उसे नष्ट किया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने स्वतंत्रता दिवस पर स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए हॉर्स ट्रेडिंग पर भी बात की है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह पशु मंडी के अंदर पशुओं की बोली लगाई जाती है उसी तरह से आज विधायकों की बोली लगाई जा रही है।

धनबल से जनमत खरीदने वालों को दंडित करें

दिग्विजय सिंह ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने कहा, 'हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और कुर्बानियों के बदले हमें आजादी मिली है। उन्होंने इसके लिए अनेकों यातनाएं सही। लेकिन आज स्वतंत्रता के उद्देश्य को नष्ट किया जा रहा है। जनमत को धनबल से खरीदा जा रहा है। चुने हुए जनप्रतिनिधियों की पशुओं की तरह बोली लग रही है।' उन्होंने सभी देशवासियों से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए धनबल से जनमत खरीदने वालों को दंड देने की अपील की है।

पंडित नेहरू ने देश को आत्मनिर्भर बनाया

इस मौके पर उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री दिवंगत पंडित जवाहरलाल नेहरू को देश को आत्मनिर्भर बनाने का श्रेय दिया। उन्होंने कहा, 'आजादी से अबतक देश ने बहुत कुछ हासिल किया। शुरुआत में यहां सुई तक नहीं बनती थी। लेकिन पंडित नेहरू ने अपने वादे के अनुसार बड़ी-बड़ी कंपनियां खोली, बांध बनवाए और उनकी सही नीतियों ने हमें विश्व के शक्तिशाली देशों की श्रेणी में लाकर खड़ा किया। स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, बलिदान और कुर्बानियों से सिख लेते हुए हमें देश के लिए समर्पण भावना के साथ निरंतर भारत को आगे ले जाने का प्रयास करना चाहिए।'