गेहूं उत्पादक किसानों को लूटने के बहाने तलाश रही सरकार, माकपा ने की MSP पर खरीदी की मांग
माकपा ने कहा कि प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए 15.60 करोड़ बोरों की जरूरत है, जबकि सरकारी एजेंसियों ने अभी तक 5.50 करोड़ बोरों की ही व्यवस्था की है।
भोपाल। गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर प्रदेश की सियासत गर्म है। राज्य में गेहूं की MSP तीन हजार रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस के बाद अब वाम दल माकपा ने राज्य सरकार पर गेहूं उत्पादक किसानों को लूटने के आरोप लगाए हैं। माकपा ने कहा कि पहले ही किसानों के बोनस में 135 रुपये की कटौती कर राज्य की डॉ मोहन यादव सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को आहत किया था, अब गेहूं खरीदी को स्थगित कर यह सरकार किसानों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि बारदाना उपलब्ध न होने का बहाना बना कर प्रदेश की भाजपा सरकार गेहूं खरीदी की तारीख आगे खिसकाने पर विचार कर रही है। सिंह ने बताया कि प्रदेश के चार संभागों; इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम में एक अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होना थी, लेकिन गेहूं के भंडारण के लिए पर्याप्त बोरे (बारदाना) न होने के कारण अब इसे आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। बारदाने का राग भी तब अलापा जा रहा है, जब 7 अप्रैल से पूरे प्रदेश में गेहूं खरीदी शुरु होने की घोषणा सरकार कर चुकी है।
माकपा नेता ने कहा है कि प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए 15.60 करोड़ बोरों की जरूरत है, जबकि सरकारी एजेंसियों ने अभी तक 5.50 करोड़ बोरों की ही व्यवस्था की है। इतने बारदाने से सिर्फ एक चौथाई गेहूं ही खरीदा जा सकता है। जसविंदर सिंह ने कहा कि सरकार अब यह भी विचार कर रही है कि बड़े किसानों का गेहूं न खरीदा जाए। हालांकि अनुभव बताता है कि इस प्रकार की व्यवस्था करने पर बड़ा किसान तो अपना गेहूं बेच लेता है, लेकिन गरीब किसान को ही औने-पौने दामों पर बिचौलियों को बेचना पड़ता है।
जसविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि इस साल भी भाजपा सरकार किसानों के गेहूं को औने-पौने दामों से खरीद कर किसानों को लूट कर बिचौलियों की तिजोरियां भरना चाहती है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मांग की है कि सरकार को बारदाने की व्यवस्था कर घोषित समय पर गेहूं की खरीदी शुरू कर पूरे गेहूं की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करे।




