NGT पहुंचा भोपाल में दूषित पानी का मामला, जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने के निर्देश
भोपाल में दूषित पानी और ई कोलाई बैक्टीरिया की शिकायतों पर एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाया है। सीपीसीबी को तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाकर 4 हफ्ते में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
भोपाल। राजधानी भोपाल में पेयजल की गुणवत्ता और जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर उठे सवाल अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तक पहुंच गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह समिति शहर के विभिन्न इलाकों में पानी के नमूनों की जांच कर स्थिति का आकलन करेगी और सुधार के लिए अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
यह मामला याचिकाकर्ता कमल कुमार राठी द्वारा एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में दायर आवेदन के जरिए उठाया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि भोपाल में पेयजल की जांच प्रशिक्षित वैज्ञानिकों के बजाय अस्थायी और अनुभवहीन कर्मचारियों से कराई जा रही है। इससे जल गुणवत्ता की निगरानी प्रभावित हो रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
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आवेदन में यह भी कहा गया कि शहर के कई इलाकों में जल संकट का समाधान करने के बजाय नगर निगम ने पानी की सप्लाई बंद कर दी गई। इसके कारण बड़ी संख्या में लोग अब टैंकरों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया गया कि भूजल में ई कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई है जो गंभीर जलजनित बीमारियों का कारण बन सकता है।
याचिका में इंदौर की उस घटना का भी उल्लेख किया गया है जहां दूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही बताया गया कि पिछले छह सालों में मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में 5.45 लाख से अधिक लोग जलजनित बीमारियों से प्रभावित हुए हैं।
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एनजीटी ने सीपीसीबी भोपाल के क्षेत्रीय निदेशक को संयुक्त जांच दल बनाने के निर्देश दिए हैं। इस टीम में सीपीसीबी के अधिकारी, जल विज्ञान विशेषज्ञ और वाटर लैंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ शामिल किए जाएंगे। समिति शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से पानी के सैंपल लेकर उनकी जांच करेगी और चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट अधिकरण के सामने पेश करेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।




