लीकेज वाले कारम डैम का पानी खाली, बड़ा संकट टला, अब डैम निर्माण में हुई भ्रष्टाचार की जांच की मांग

धार जिले के लीकेज वाले कारम डैम का पानी अब खाली हो गया है, प्रशासन के मुताबिक अब खतरा टल गया है, विपक्षी दल कांग्रेस ने अब इस डैम निर्माण में हुई भ्रष्टाचार की मांग की मांग की है

Updated: Aug 15, 2022, 12:46 PM IST

लीकेज वाले कारम डैम का पानी खाली, बड़ा संकट टला, अब डैम निर्माण में हुई भ्रष्टाचार की जांच की मांग

धार। मध्य प्रदेश के धार जिले के लीकेज वाले कारम डैम का पानी अब लगभग खत्म हो गया है। शासन-प्रशासन का दावा है कि अब संकट टल गया है। अधिकारियों के मुताबिक डैम में 15 एमक्यूएम पानी में से करीब 12 एमक्यूएम से ज्यादा पानी खाली हो चुका है। संकट टलने के बाद अब विपक्षी दल कांग्रेस ने डैम निर्माण में हुई भ्रष्टाचार की जांच की मांग की है।

कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष केदार सिरोही ने कहा कि, 'संकट में हम सियासत को नहीं लाते हैं किन्तु अब संकट टल गया इसलिए खुलकर इस भ्रष्टाचार पर लड़ा जाना चाहिए और मैं तो सभी गाँव के लोगों से आग्रह करता हूँ की जिस तरह चार दिन आपने घर से बाहर निकाले हैं ठीक वैसे अब आगरा बॉम्बे रोड पर पशुओ के साथ डेरा डाल दो। डैम के बचाव कार्य पर बोल रहे किन्तु यह नौबत क्यों आई हैं इस पर क्यों नहीं बोल रहे हैं। अब TAX pay करने वाली मुहीम की गैंग कहा हैं उनके पैसे पर खुलेआम भ्रष्टाचार हुआ हैं अब कब बोलेंगे? दोषियों के खिलाफ सड़क पर आएंगे?'

बता दें कि 305 करोड़ की लागत से बनी यह डैम पहली बारिश भी झेल नहीं सकी। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी इस डैम में रिसाव के बाद करीब 20 हजार लोगों को बेघर होना पड़ा। जान बचाने के लिए उन्होंने पहाड़ पर शरण ले रखी थी। ये डैम अभी लीकेज के चलते चर्चा में है, लेकिन टेंडर में गड़बड़ी के चलते भी ये सुर्खियों में रहा है। इस प्रोजेक्ट के टेंडर में गड़बड़ी की जांच EOW कर रही है। सरकार इसी साल मार्च में यह मान चुकी है कि कारम डैम प्रोजेक्ट के टेंडर में गड़बड़ी हुई है। एक सवाल के जवाब में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने 10 मार्च 2022 को विधानसभा में गड़बड़ी की बात स्वीकार की थी।

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दरअसल, मध्य प्रदेश में ई-टेंडर घोटाला विधानसभा चुनाव से पहले अप्रैल 2018 में उस समय सामने आया था, जब जल निगम की तीन निविदाओं को खोलते समय कम्प्यूटर ने एक संदेश डिस्प्ले किया। इससे पता चला कि निविदाओं में टेम्परिंग की जा रही है। यानी ई टेंडरिंग के साथ छेड़छाड़ की जा रही है और गलत कंपनियों को ठेका दिया जा रहा है।तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आदेश पर इसकी जांच EOW को सौंपी गई थी।

हालांकि, चार साल गुजरने के बाद भी जांच नतीजे तक नहीं पहुंचा। इसका नतीजा ये हुआ कि 20 हजार लोगों को गांव खाली करना पड़ा। हजारों लोगों की जान पर आफत आ गई थी। गनीमत रही कि इस दौरान इलाके में बारिश नहीं हुई और प्रशासन को पानी निकालने के लिए समय मिल गया। यदि ऐसा नहीं होता तो हजारों लोगों की जान पर बन आती। एस में अब सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार जिम्मेदारी तय करेगी और भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्री-अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी?