वोटतंत्र पर हावी नोटतंत्र: अशोकनगर में हुई सरपंच पद की नीलामी, 44 लाख की बोली पर सरपंच निर्वाचित

अशोकनगर जिले में भटौली ग्राम पंचायत में सर्वसम्मति से निर्विरोध चुना गया सरपंच, ग्राम पंचायत में हुई थी पद की नीलामी, सर्वाधिक 44 लाख की बोली लगाने वाले को मिला पद

Updated: Dec 15, 2021, 10:21 AM IST

वोटतंत्र पर हावी नोटतंत्र: अशोकनगर में हुई सरपंच पद की नीलामी, 44 लाख की बोली पर सरपंच निर्वाचित
Photo Courtesy: Naidunia

अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में वोटतंत्र पर हावी नोटतंत्र का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां ग्राम पंचायत भटौली के लोगों ने चुनाव प्रक्रिया के बजाए नीलामी प्रक्रिया के तहत अपने जनप्रतिनिधियों को चुनने का निर्णय लिया है। सरपंच पद के लिए हुई नीलामी के दौरान सर्वाधिक 44 लाख की बोली लगाने वाले व्यक्ति को ग्रामीणों ने माला पहनाकर अपना सरपंच चुन लिया।

बताया जा रहा है कि अशोकनगर जिला के चंदेरी जनपद अंतर्गत भदौली ग्राम पंचायत के राधा कृष्ण मंदिर में ग्रामीणों की बैठक हुई थी। इस बैठक में सभी समाज के लोगों ने हिस्सा लिया था। बैठक के दौरान सर्वसम्मति से यह निर्धारित किया गया कि इसबार नीलामी प्रक्रिया से नेताओं को चुना जाए। मंगलवार को इसी मंदिर में नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई।

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सरपंच पद के चार दावेदार इस नीलामी प्रक्रिया में शामिल हुए थे। ग्रामीणों के मुताबिक नीलामी की शुरुआत ही 21 लाख रुपए से हुई। इसके बाद यहां मौजूद अन्य उम्मीदवारों ने राशि बढ़ाकर बोली लगाई। यह बोली 43 लाख रुपए तक पहुंच गई, जिसके बाद सौभाग सिंह यादव ने 44 लाख रुपए की बोली लगाकर डील अपने नाम किया। चुनाव से पहले ही ग्रामीणों ने भी उन्हें माला पहनाकर अपना नया सरपंच चुन लिया और यह तय हुआ कि उनके खिलाफ कोई नामांकन नहीं करेगा और वे निर्विरोध रहेंगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भी तय कहा गया है कि अगर सौभाग सिंह बुधवार शाम तक यदि वे 44 लाख रुपए जमा नहीं करते हैं, तो उनके निकटतम प्रतिद्वंदी द्वारा लगाई गई बोली को मान्य किया जाएगा। मामले पर ग्रामीणों का कहना है कि वे चुनाव में होने वाले अनावश्यक खर्च को रोक रहे है और सर्वसम्मति वाली प्राचीन परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। हमारा चुनाव आयोग से कोई सरोकार नहीं है, इस पैसे का खर्च गांव के विकास कार्यों में किया जाएगा।

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सरपंच पद खरीदने वाले सौभाग सिंह ने स्थानीय मीडियाकर्मियों से कहा कि गांव में कोई हिंसा न हो और शांति बनी रहे, इसलिए  मंदिर पर चुनाव रखा गया। मेरी इच्छा नहीं थी, लेकिन ग्रामीणों ने ये प्रक्रिया तय किया, जिसमें मैं शामिल हुआ। इस बोली में चार उम्मीदवार शामिल हुए थे और 44 लाख रुपए पर बोली समाप्त हुई।