कर्ज बढ़ता गया, फिजूलखर्ची नहीं रुकी, MP सरकार फिर लेगी 3 हजार करोड़ का कर्ज
नीति आयोग और CAG द्वारा लगातार चेतावनी के बावजूद खर्चो में कटौती की बजाए सरकार इमेज चमकाने और अत्याधुनिक उड़नखटोलों पर पानी की तरह पैसे बहा रही है।
भोपाल। कर्ज के बोझ तले दबे मध्य प्रदेश सरकार की फिजूलखर्ची रुकने का नाम नहीं ले रही है। राज्य सरकार की कुल देनदारी पांच लाख करोड़ रुपये को पार कर चुकी है। सरकार की आय का एक बड़ा हिस्सा कर्ज पर ब्याज चुकाने में जा रहा है। इसके बावजूद सरकार का फोकस कर्ज का बोझ कम करने की बजाय, बार-बार कर्ज लेने पर है। राज्य सरकार एक बार फिर 3 हजार करोड़ रुपए कर्ज लेने जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 की निर्धारित ऋण सीमा के तहत एक-एक हजार करोड़ रुपये की तीन किस्तों में यह कर्ज लिया जाएगा। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारत सरकार ने मध्यप्रदेश की ऋण सीमा करीब 87 हजार करोड़ रुपए तय की है और सितंबर तक इसमें से 37 हजार 400 करोड़ रुपए का ऋण लिया जा चुका है।
राज्य पर लगातार बढ़ते कर्ज के बोझ के बीच भी सरकार की फिजूलखर्ची कम होती नजर नहीं आ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार प्रतिदिन औसतन 1 करोड़ 90 लाख रुपये विज्ञापन और प्रचार पर खर्च कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जनसंपर्क विभाग को विज्ञापन और प्रचार के लिए 632.37 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। बाद के संशोधित अनुमान में इसे बढ़ाकर 727.93 करोड़ रुपये कर दिया गया। खास बात ये है कि विज्ञापन और प्रचार पर खर्च करने वाला जनसंपर्क विभाग मुख्यमंत्री के ही अधीन है।
इतना ही नहीं राज्य सरकार कर्जखोरी कम करने की बजाय उड़नखटोलों पर भी करोड़ों रुपए फूंक रही है। शासन ने 350 करोड़ रुपए का बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 जेट का ऑर्डर दिया है। जल्द ही इसकी डिलीवरी होगी। इसके साथ ही सरकार फ्रांस की एयरबस से ACH 160 हेलीकॉप्टर खरीदने वाली है। टैक्स और शुल्क समेत इसकी कीमत करीब 225 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इसकी डिलीवरी नवंबर 2026 में प्रस्तावित है।
हैरानी की बात ये है कि नीति आयोग और CAG द्वारा लगातार चेतावनी के बावजूद खर्चो में कटौती की बजाए सरकार इमेज चमकाने और अत्याधुनिक उड़नखटोलों पर पानी की तरह पैसे बहा रही है।
राज्य सरकार की कर्जखोरी पर विपक्ष भी हमलावर है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक एक्स पोस्ट में कहा कि मध्य प्रदेश सरकार फिर 3,000 करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है और वही तर्क दोहरा रही है कि यह कर्ज पूंजीगत खर्च के लिए है। उन्होंने कहा कि इसीलिए वे पुराना सवाल ही दोहरा रहे हैं। पटवारी ने पूछा कि यदि कर्ज बढ़ता जा रहा है, तो विकास की रफ्तार और रोजगार की बहार कहां गुम हो गई है? उन्होंने आरोप लगाया कि भविष्य गिरवी रखकर भला करने का झूठा भरोसा भाजपा की फ़ितरत है। इसी की आड़ में मिशन करप्शन और कमीशन चल रहा है।




