Mandsaur: शहीद के सम्मान के लिए ग्रामीणों ने किया चक्काजाम

मध्य प्रदेश के मंदसौर में शहीद सैनिक गोवर्धन सिंह सिसोदिया के परिवार को एक करोड़ रुपये की मदद और पत्नी को नौकरी का आश्वासन मिलने के बाद ही हटाया जाम

Updated: Dec 03, 2020, 10:14 PM IST

Mandsaur: शहीद के सम्मान के लिए ग्रामीणों ने किया चक्काजाम
Photo Courtesy: Patrika

मंदसौर। शहीद के सम्मान के लिए गांव वालों ने किया चक्काजाम। ये वाकया मध्य प्रदेश के मंदसौर का है। दरअसल मंदसौर के गांव गुड़बेली के रहने वाले सेना के जवान गोवर्धन सिंह सिसोदिया का निधन सिक्किम में ड्यूटी के दौरान हुए सड़क हादसे में हो गया था। जिसके बाद गुरुवार को उनका शव उनके गांव लाया गया। लेकिन जवान के अंतिम संस्कार से पहले ग्रामीणों ने मंदसौर-नीमच हाईवे पर जाम लगा दिया।

गांव वाले इस बात से नाराज़ थे कि शहीद सैनिक की अंतिम यात्रा में बड़े प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय विधायक और मंत्री उपस्थिति नहीं थे। इस बात से नाराज़ सैकड़ों गांव वालों ने धरियाखेड़ी फंटा के पास हाईवे पर चक्का जाम कर दिया, जिससे कई किलोमीटर तक ट्रैफिक ठप हो गया।  

ग्रामीणों का आरोप था कि जवान गोवर्धनसिंह की शहादत हुई है, लेकिन अब तक शासन और प्रशासन की तरफ से किसी तरह की घोषणा नहीं की गई। ग्रामीणों की मांग थी कि शहीद के परिजन को एक करोड़ रुपये की मदद और उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए। करीब दो घंटे लगे जाम के बाद विधायक यशपालसिंह सिसौदिया पहुंचे और उन्होंने आश्वासन दिया जिसके बाद मामला शांत हो सका। विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया ने ग्रामीणों को बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात की है, ग्रामीणों की मांग पूरी होगी, सरकार शहीद के सम्मान में कोई कमी नहीं आने देगी।

 गौरतलब है कि सेना में ड्यूटी के दौरान अक्सर सैनिक युद्ध के अलावा दुर्घटना की शिकार होते हैं, और उनका निधन हो जाता है, ऐसे मामलों में परिजनों को सेना की तरफ से सिर्फ भविष्यनिधि की रकम ही दी जाती है। लेकिन सरकार नियमों का हवाला देकर आर्थिक मदद नहीं करती है। इस वजह से गोवर्धन सिंह सिसोदिया के परिजनों और ग्रामीणों ने शहीद के अंतिम संस्कार से पहले यह मुद्दा उठाया।

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से प्रदेश के हर शहीद के परिवार को एक करोड़ की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है। लेकिन इसका एक पक्ष यह भी है कि जब गोवर्धन सिंह सिसोदिया के परिजन सरकार से सहायता राशि के लिए आवेदन करते, तब कहा जाता कि 'आपका बेटा दुश्मन की गोली से शहीद नहीं हुआ।' यही कारण है कि ग्रामीणों ने सैनिक के परिजनों को सरकारी मदद दिलाने के लिए जाम का रास्ता अख्तियार किया।