MCU में पत्रकारिता के प्रोफेसर पर छात्रों को उकसाने का आरोप, WhatsApp ग्रुप में भेजा भड़काऊ वीडियो

भोपाल स्थित माखनलाल विश्वविद्यालय में जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष, आशीष जोशी ने व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजा था वीडियो, छात्रों के विरोध के बाद प्राध्यापक ने दिया पत्रकारिता के दोनों पक्षों को जानने का हवाला

Updated: Aug 02, 2021, 06:13 PM IST

MCU में पत्रकारिता के प्रोफेसर पर छात्रों को उकसाने का आरोप, WhatsApp ग्रुप में भेजा भड़काऊ वीडियो

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा को शिक्षण संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के ऊपर थोपने के लिए विवादों में रहने वाला भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों में है। आरोप विश्वविद्यालय में जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष आशीष जोशी पर लगा है। जोशी पर एक समुदाय विशेष के खिलाफ छात्रों को भड़काने का आरोप लगा है। आशीष जोशी ने कथित तौर पर अपनी कक्षा के व्हाट्सएप ग्रुप में मुसलमानों के खिलाफ घृणा फैलाने वाले वीडियो को संप्रेषित किया। लेकिन छात्रों ने जब व्हाट्सएप ग्रुप में शिक्षक के विचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, तब वे कहते हुए सफाई देने लगे कि पत्रकारिता के दोनों पक्षों को जानने के लिए उन्होंने वीडियो शेयर किया था।

अब्दुल चाचा द्वारा गोश्त खिलाने के बाद ही जीता मीराबाई चानू ने ओलंपिक में मेडल 

विवाद माखनलाल विवि में प्राध्यापक आशीष जोशी द्वारा छात्रों को व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए एक वीडियो के बाद शुरू हुआ है। पूर्व में लोकसभा चैनल के एडिटर रह चुके, आशीष जोशी ने ग्रुप में कपोल कल्पना पर आधारित एक वीडियो साझा किया, जिसमें यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि कैसे सेक्युलरिज्म (धर्मनिरपेक्षता) इस देश के लिए एक खतरा है। 

आशीष जोशी द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा को गलत करार देने के लिए टोक्यो में ओलंपिक मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू का हवाला दिया गया है। प्राध्यापक द्वारा साझा किए गए वीडियो में बताया गया है कि अगर इस देश में सेक्युलरिज्म बचा रह गया तो मीराबाई चानू को लेकर आने वाले समय में जो फिल्म बनेगी उसमें यही चित्रण किया जाएगा कि शांतिप्रिय समुदाय (वीडियो में मुसलमानों के ऊपर कसा गया तंज) से आने वाले अब्दुल चाचा ने मीराबाई को गोश्त खिलाया और मीराबाई के लिए जब मजार पर जाकर दुआ मांगी तब जाकर मीराबाई ने ओलंपिक में मेडल जीता।

इस फिल्म में बताया गया है कि यदि देश में सेक्युलरिज्म बचा रह गया तो आनेवाले दिनों में मीरबाई चानू का गृह राज्य मणिपुर, मियांपुर के ऐतिहासिक नाम से जाना जाएगा। वीडियो में शाहरुख खान की चक दे इंडिया, आमिर खान की दंगल और अक्षय कुमार की गोल्ड फिल्म का हवाला देकर कहा गया है कि इन फिल्मों को जरिए जिहादी एजेंडे को प्रचारित किया गया है।

छात्रों ने शिक्षक को पढ़ाया पत्रकारिता का पाठ 

ग्रुप के सदस्य छात्रों को आशीष जोशी द्वारा भेजा गया वीडियो बेहद नागवार गुजरा। छात्रों ने शिक्षक को नैतिकता, धर्मनिरपेक्षता और खुद पत्रकारिता का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया। ग्रुप के सदस्य एक छात्र ने वीडियो को लेकर कहा कि समाज को तोड़ने वाली इसी विचारधारा के कारण हमारा देश तरक्की नहीं कर पा रहा है। इस तरह के वीडियो हमारे देश की एकता और समाज को तोड़ने का काम करते हैं। सभी छात्र शिक्षक द्वारा ग्रुप में भेजे गए वीडियो के खिलाफ एक सुर में बोलने लगे और आशीष जोशी से स्पष्टीकरण मांगने लगे। यही नहीं, वीडियो को डिलीट करने की मांग भी की जाने लगी।

शिक्षक ने भी छात्रों को दिया पत्रकारिता का हवाला 

जब व्हाट्सएप ग्रुप में आशीष जोशी ने बवाल मचता हुआ देखा, तब छात्रों के सामने पत्रकारिता के गुण दोष का हवाला देने लगे। आशीष जोशी ने कहा कि ये एक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता हुआ वीडियो है और पत्रकारिता छात्र होने के नाते छात्रों को हर पक्ष को जानना चाहिए। जोशी ने छात्रों से कहा कि मैंने आप लोगों पर कोई विचार थोपा नहीं है, आप अपनी राय बनाने के लिए स्वतंत्र हैं। 

 लेकिन शिक्षक द्वारा वीडियो को लेकर दिया गया स्पष्टीकरण छात्रों के गले नहीं उतरा । छात्रों ने आशीष जोशी द्वारा भेजे गए वीडियो के साथ की गई अपील की याद दिलाई। आशीष जोशी ने ग्रुप में वीडियो को भेजते समय छात्रों से चैनल को सब्सक्राइब करने की बात कही थी। छात्रों ने आशीष जोशी के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आप हमारे ऊपर किसी विचार को थोपना नहीं चाहते थे, तब हमसे चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए क्यों कहा? छात्रों ने उल्टा जोशी से यह मांग भी की कि अब से वो दूसरे पक्ष की यानी गैर दक्षिणपंथी विचार के वीडियो साझा करें और सब्सक्राइब भी करने की अपील करें। 

देश के सामाजिक सौहार्द और एकता के मसले पर नहीं हो सकता कोई समझौता 

पत्रकारिता की पढ़ाई करने आए एक छात्र ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि "विश्वविद्यालय में यह एक खुला राज़ है कि ज्यादातर प्राध्यापक संघ की विचारधारा से ताल्लुक रखते हैं, प्राध्यापक आशीष जोशी भी इसी विचारधारा से आते हैं। छात्र ने बताया कि शुक्रवार (30 जुलाई)  की रात 10.30 बजे आशीष जोशी ने जनसंचार विभाग के सभी ग्रुप्स में ये वीडियो भेजा था। जिसमें इस वीडियो को सब्सक्राइब करने की अपील भी थी। छात्रों ने सवाल करना शुरू किया तो उन्होंने ढ़ाई घंटे बाद कहा कि वो पत्रकारीय उसूलों के हिसाब से छात्रों को शिक्षित करने के लिए वीडियो भेज रहे थे। छात्र इस तरह का जवाब सुन और उद्वेलित हो गए और कुछ ने विडियो डिलीट करने की भी मांग की।"

विश्वविद्यालय के ही एक अन्य पूर्व छात्र, सुहृद तिवारी ने बताया कि "आशीष जोशी पर लोकसभा चैनल के एडिटर रहने के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। पूर्व छात्र ने दावा किया कि जब वे विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे उस दौरान भी संस्थान में एक खास विचारधारा को थोपने के लिए एबीवीपी से जुड़े लोगों को विश्वविद्यालय में प्रवेश दिलाया जाता था।" सुहृद तिवारी ने आगे कहा कि ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जो इस बात की गवाही देते हैं कि कैसे विश्वविद्यालय में छात्रों का एक खास विचारधारा के प्रति झुकाव बनाने की एक सुनियोजित साजिश की जाती है।

पहले भी विवादों में रह चुका है माखनलाल विश्वविद्यालय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा छात्रों के ऊपर थोपने का यह प्रकरण नया नहीं है। अंग्रेजी दैनिक अखबार में काम करने वाले माखनलाल विश्वविद्यालय के ही एक पूर्व छात्र ने तो यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों को संघ की विचारधारा के समर्थित कार्यक्रमों में औपचारिक तौर पर ट्रेनिंग दिलाने के लिए भी ले जाया जाता रहा है।