शहडोल में वन विभाग की टीम पर खनन माफिया का हमला, पुलिस पर सहयोग ने करने के लगे आरोप

शहडोल में अवैध कोयला खनन रोकने गई वन विभाग की टीम पर कोल माफिया ने खूनी हमला किया। माफिया ने रेंजर की वर्दी फाड़कर उन्हें बेरहमी से पीटा और महिला DFO श्रद्धा पन्द्रे से अभद्रता की।

Updated: Feb 14, 2026, 05:33 PM IST

शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र में अवैध कोयला उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई करने गई वन विभाग की टीम पर 20 से 30 की तादाद में कोल माफिया ने हमला कर दिया। रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा को गाड़ी से खींचकर पीटा गया। साथ ही उनकी वर्दी भी फाड़ दी गई। इस दौरान महिला डीएफओ श्रद्धा पन्द्रे के साथ भी अभद्रता और गाली गलौज की गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के करीब 23 से 24 घंटे बाद पुलिस ने केस दर्ज किया। वन मंडलाधिकारी ने खुले तौर पर पुलिस पर सहयोग न करने और कोल माफिया से सांठगांठ के गंभीर आरोप लगाए हैं।

वन विभाग ने बताया कि यह कार्रवाई वाइल्ड ऑपरेशन ट्रैप-2 के तहत संवेदनशील क्षेत्रों में की जा रही गश्त का हिस्सा थी। कार्रवाई कर लौटते समय ही वन अमले पर हमला हुआ और कुछ कर्मचारियों को बंधक बनाने की भी कोशिश की गई। आखिरकार गुरुवार देर रात सोहागपुर पुलिस ने रेंजर की शिकायत पर बिट्टन सिंह, चिंटू सिंह, राजू सिंह सहित अन्य के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, बलवा, मारपीट, गाली गलौज और तोड़फोड़ की धाराओं में मामला दर्ज किया है। 

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घटना बीते 11 फरवरी की शाम की बताई जा रही है। खेतावली गांव के ऊपर टोला और बड़खेरा अंतर्गत खितौली बीट सीमा स्थित सोन नदी के आसपास अवैध कोयला खनन और परिवहन की सूचना वन विभाग को मिली थी। ग्रामीणों ने भी शिकायत की थी कि बस्ती के बीच से अवैध कोयले से लदे ट्रैक्टर तेज रफ्तार में गुजरते हैं जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची लेकिन पुलिस दल काफी देर से पहुंचा।

वन विभाग के अनुसार, जब टीम ने अवैध कोयला परिवहन कर रहे ट्रैक्टर को पकड़ा तो माफिया ट्रैक्टर को बीच सड़क पर खाली कर फरार हो गए। इसी दौरान हथियारबंद लोगों का एक समूह मौके पर पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, 20 से 30 लोगों ने एक साथ वन विभाग की टीम को घेर लिया। इनमें से कुछ के हाथ में बंदूक भी थी। वहीं, कुछ लोग तलवार लेकर आए थे। उन्होंने रेंजर की गाड़ी रोकी और उन्हें जबरन बाहर निकाल कर उनके साथ मारपीट की। इस दौरान माफियायों ने रेंजर की वर्दी तक फाड़ दी थी। हालांकि, किसी तरह रेंजर वहां से जान बचाकर निकलने में सफल रहा।

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डीएफओ श्रद्धा पन्द्रे ने बताया कि उन्हें रात करीब 7 बजे घटना की सूचना मिली थी। वे बुढ़ार में मीटिंग के बाद घटनास्थल के लिए रवाना हुई। उनका आरोप है कि रेंजर रात करीब 11 बजे सोहागपुर थाने पहुंच गए थे लेकिन सुबह 4 बजे तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। इस दौरान पुलिस बार-बार आवेदन बदलवाती रही थी। रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा का कहना है कि उनसे तीन बार शिकायत पत्र दोबारा लिखवाया गया और पुलिस अपनी भाषा में आवेदन देने का दबाव बना रही थी। इसके बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया।

डीएफओ का आरोप है कि बीते 12 फरवरी की रात तक भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। वहीं, पुलिस उन्हें गुमराह करती रही कि केस दर्ज हो चुका है। उन्होंने कहा कि पुलिस पहले यह कहती रही कि मौके पर कोयला नहीं मिला जबकि वहां कोयले का ढेर मौजूद था। बाद में यह तर्क दिया गया कि विवाद वन अमले द्वारा हूटर बजाने से हुआ था। डीएफओ ने दोनों दलीलों को निराधार बताया और कहा कि पुलिस पहले वन कर्मचारियों के बयान लेने की बात कहकर कार्रवाई टालती रही थी। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनके फोन कॉल तक रिसीव नहीं किए थे।

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गांव खितौली और उमर टोला के ग्रामीणों ने बताया कि घोड़सा नाला क्षेत्र से लंबे समय से अवैध कोयला निकाला जा रहा है। यहां से रोज दर्जनों ट्रैक्टर करीब 7 किलोमीटर दूर बरखेड़ा की ओर कोयला लेकर जाते हैं। माफिया 24 घंटे इलाके की रेकी करते हैं और मोबाइल के जरिए आपस में संपर्क में रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तेज रफ्तार ट्रैक्टरों से कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। वे पहले भी पुलिस से इस मामले में शिकायत कर चुके हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती। 

जिले के एएसपी अभिषेक दीवान ने तीन नामजद आरोपियों सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज होने की पुष्टि की है और जांच जारी होने की बात कही है। वहीं, सोहागपुर थाना प्रभारी अरुण कुमार पांडेय ने कहा कि रेंजर की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि शहडोल जिले में अवैध खनन को लेकर पहले भी हमले हो चुके हैं। इससे पहले ब्यौहारी क्षेत्र में रेत माफियाओं द्वारा पटवारी और एएसआई पर ट्रैक्टर चढ़ाकर हत्या की खबर सामने आ चुकी है।

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