MP: मुलताई में नहर की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन, नहर नहीं तो जहर दो के नारे लगाए

वर्धा बांध की नहर से वंचित चार गांवों के किसानों ने मुलताई पहुंचकर प्रदर्शन किया। किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर गोपल तलाई, चौथिया, सोनोली और जाम गांव को शीघ्र नहर से जोड़ने की मांग की।

Updated: Feb 03, 2026, 11:06 AM IST

मुलताई। मध्य प्रदेश के मुलताई में सालों से बांध से निकलने वाली मुख्य नहर से वंचित चार गांवों के किसानों ने शुक्रवार को तहसील कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। गोपल तलाई, चौथिया, सोनोली और जाम गांव के किसानों ने नहर दो नहीं तो जहर दो जैसे तीखे नारे लगाते हुए एसडीएम राजीव कहार को ज्ञापन सौंपा और तत्काल नहर से जोड़ने की मांग की।

प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि उनके गांव वर्धा डैम से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। इसके बावजूद उन्हें आज तक सिंचाई का पानी नहीं मिला। जबकि, यही नहर उनके गांवों को पार करते हुए 30 से 40 किलोमीटर दूर अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाई गई है। किसानों ने इसे घोर अन्याय बताते हुए सिंचाई विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

किसानों ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी वर्धा सिंचाई परियोजना का वास्तविक लाभ बांध के आसपास के गांवों तक नहीं पहुंच पाया है। अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी के चलते सालों से किसान सिंचाई के पानी के लिए भटक रहे हैं जिससे क्षेत्र में लगातार आक्रोश बढ़ रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सिंचाई विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। तहसील परिसर नहर दो नहीं तो जहर दो के नारों से गूंज उठा। चारों गांवों के किसान एकसाथ तहसील कार्यालय पहुंचे और एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए शीघ्र नहर से जोड़ने की ठोस कार्रवाई की मांग की।

किसानों ने यह भी बताया कि वर्धा सिंचाई परियोजना को शुरू हुए आठ साल से अधिक समय बीत चुका है लेकिन आज भी आसपास के दर्जनों गांव इसके लाभ से वंचित हैं। परियोजना के लिए किसानों ने अपनी जमीनें दी पर बदले में उन्हें सिंचाई का पानी नसीब नहीं हुआ। बची हुई खेती की जमीन आज भी बारिश पर निर्भर है।

इसके साथ ही किसानों ने अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि बिना समुचित नाप तोल और पारदर्शिता के निजी कंपनियों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। जबकि, वास्तविक हकदार किसान सूखे खेतों के साथ संघर्ष कर रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल नहर से चारों गांवों को जोड़ा जाए।